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हल्द्वानी में रामपुर रोड की बदहाल सड़क पर फूटा गुस्सा: 5 माह से खोदी मुख्य सड़क पर 50 से 60 दुर्घटनाओं का दावा, जल्द डामरीकरण नहीं हुआ तो जाम कर आंदोलन की चेतावनी

रामपुर रोड़ मुख्य मार्ग मै प्रशासन एवं अधिकारियों के खिलाफ गड्ढों मै फूल अगरबत्ती जलाकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया 

 रामपुर रोड़ सिंधी चौराहे से अग्रसेन भवन, समता आश्रम, हिमालय फॉर्म तक मुख्य मार्ग रामपुर रोड़ की सड़को मै जगह जगह गड्ढे हो रहे है 

हल्द्वानी। शहर की प्रमुख रामपुर रोड पर जल निगम की पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़क लंबे समय से बदहाल स्थिति में होने को लेकर क्षेत्रवासियों और समाजसेवियों में भारी आक्रोश है। समाजसेवी विशाल वर्मा ने आरोप लगाया कि जल निगम द्वारा पाइपलाइन डालने के नाम पर करीब पांच माह पहले रामपुर रोड के मुख्य मार्ग को खोदा गया था, लेकिन इसके बाद भी सड़क का समुचित निर्माण और डामरीकरण नहीं किया गया।

विशाल वर्मा ने दावा किया कि सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण बीते पांच माह के दौरान करीब 50 से 60 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि गनीमत रही कि अब तक किसी बड़ी जनहानि की घटना सामने नहीं आई, लेकिन आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं में बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और अन्य राहगीर चोटिल हो रहे हैं। उन्होंने सड़क की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि गड्ढों के कारण भविष्य में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग और अधिकारियों की लापरवाही के चलते रामपुर रोड पर लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशाल वर्मा ने कहा कि सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग को लेकर पूर्व में तत्कालीन जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल को ज्ञापन भी सौंपा गया था। इसके अलावा लगातार आंदोलन और प्रदर्शन किए गए, लेकिन इसके बावजूद जल निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों द्वारा सड़क को दुरुस्त करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप

राज्य आंदोलनकारी एवं पूर्व मेयर प्रत्याशी ललित जोशी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन पूरी तरह विफल साबित हो रहा है और शहर का सिस्टम गंभीर रूप से प्रभावित है। उन्होंने कहा कि सिर्फ रामपुर रोड ही नहीं, बल्कि शहर के कई हिस्सों में सड़कें गड्ढों से भरी हुई हैं।

ललित जोशी ने आरोप लगाया कि जिस सड़क का निर्माण दो वर्ष पहले पूरा हो जाना चाहिए था, उसका निर्माण आज तक अधूरा पड़ा हुआ है। उन्होंने मांग की कि सड़क निर्माण में हुई देरी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदारों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

सिंधी चौराहे से सुशीला तिवारी अस्पताल तक जाम की समस्या

पूर्व पार्षद प्रत्याशी अंजलि वर्मा ने कहा कि जल निगम द्वारा सड़क खोदने के बाद भी शासन और प्रशासन की ओर से समय पर डामरीकरण नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि रामपुर रोड जैसे व्यस्त मुख्य मार्ग पर बड़े-बड़े गड्ढे होने से स्थानीय लोगों के साथ ही रोजाना आने-जाने वाले हजारों वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि सिंधी चौराहे से लेकर सुशीला तिवारी अस्पताल क्षेत्र तक आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है। सड़क पर बने गड्ढों के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है, जिससे यातायात प्रभावित होता है और लंबा जाम लग जाता है।

अंजलि वर्मा ने कहा कि सड़क की खराब हालत के कारण एंबुलेंस और स्कूल बसों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। गंभीर मरीजों को लेकर जाने वाली एंबुलेंस को जाम और खराब सड़क के बीच से निकलने में कठिनाई होती है, जबकि स्कूली बच्चों से भरी बसों को भी जोखिम उठाकर गुजरना पड़ रहा है।

धूल-मिट्टी से बीमारी फैलने की आशंका

स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण कार्य अधूरा रहने से उठने वाली धूल-मिट्टी पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि सड़क पर लगातार वाहनों की आवाजाही के कारण धूल आसपास के दुकानों और खाने-पीने की वस्तुओं तक पहुंच रही है। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है।

विशाल वर्मा ने कहा कि रामपुर रोड से कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों का लगातार आवागमन होता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश, कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत, जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन इसके बावजूद शहर की प्रमुख सड़क का निर्माण लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है।

उन्होंने जल निगम के अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि जल्द ही सड़क का डामरीकरण और गड्ढों की मरम्मत नहीं की गई तो क्षेत्रवासियों के साथ मिलकर रामपुर रोड के मुख्य मार्ग को जाम कर आंदोलन और प्रदर्शन किया जाएगा।

क्षेत्रवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क को दुरुस्त नहीं किया गया तो किसी भी संभावित दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी संबंधित विभाग, अधिकारियों और ठेकेदारों की होगी।