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उत्तराखंड में नकली दवाओं की फैक्ट्री पर बड़ी कार्रवाई, एक करोड़ की दवाएं सील; अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़

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देहरादून में नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़, यूपी क्राइम ब्रांच की टीम ने 1 करोड़ की दवा और मशीनें की जब्त

उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, क्राइम ब्रांच गाजियाबाद और उत्तराखंड औषधि विभाग की संयुक्त छापेमारी, आठ आरोपियों पर एफआईआर दर्ज

देहरादून। नकली दवा निर्माण और बिक्री के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) उत्तर प्रदेश, क्राइम ब्रांच गाजियाबाद और उत्तराखंड औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने देहरादून में संचालित एक अवैध नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान करीब एक करोड़ रुपये मूल्य की दवाएं, मशीनें, टैबलेट, कैप्सूल और अन्य उपकरण सील कर दिए गए।

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा गठित विशेष प्रवर्तन टीम के नेतृत्व में की गई। टीम में औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा (आगरा), गौरव लोधी (मेरठ मंडल) और नीलेश शर्मा (आगरा) शामिल रहे। टीम ने क्राइम ब्रांच गाजियाबाद के सहयोग से अंतरराज्यीय संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया।

जांच में सामने आया कि गिरोह प्रसिद्ध कंपनियों के नाम पर 43 प्रकार की नकली दवाओं का निर्माण और सप्लाई कर रहा था। मामले में फैक्ट्री संचालक गौरव त्यागी (रुड़की), राजेन्द्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा (रुड़की), विपिन भटनागर, विनय चंद समेत कुल आठ लोगों के खिलाफ लखनऊ के थाना अमीनाबाद में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

कार्रवाई के दौरान गिरोह के मुख्य वितरक राजेन्द्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा को गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन के पास से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ और उसके मोबाइल की डिजिटल जांच में व्हाट्सएप पर प्रसिद्ध ब्रांडों की नकली दवा स्ट्रिप्स की तस्वीरें मिलीं। जांच में यह भी सामने आया कि नकली स्ट्रिप्स पर चेतावनी बॉक्स में गलत वर्तनी (स्पेलिंग) का इस्तेमाल किया गया था। मोबाइल से नकली दवाओं के निर्माण में प्रयुक्त मशीनों, चेंज पार्ट्स और अन्य उपकरणों से संबंधित फोटो और चैट भी बरामद हुई हैं।

जांच एजेंसियों को सूचना मिली थी कि देहरादून के देवीपुर न्यू हाईवे रोड, परुवल, ईस्ट होपटाउन स्थित एक अवैध फैक्ट्री में नकली दवाओं का निर्माण कर उन्हें उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में सप्लाई किया जा रहा है। सूचना के आधार पर उत्तराखंड औषधि निरीक्षकों के साथ संयुक्त छापेमारी की गई।

छापे के दौरान उत्तराखंड की टीम ने पांच दवाओं के नमूने जांच के लिए संग्रहित किए। वहीं फैक्ट्री में मौजूद बड़ी मात्रा में तैयार दवाओं, कच्चे माल, टैबलेट, कैप्सूल और निर्माण मशीनों को सील कर दिया गया। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई गई है।

अधिकारियों के अनुसार, बरामद नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियां गिरोह के नेटवर्क, सप्लाई चेन और अन्य राज्यों में जुड़े लोगों की भी तलाश कर रही हैं।