नैनीताल/ज्योलीकोट। ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति को लेकर जनता का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। दूषित पानी पीने से कथित तौर पर दो लोगों की मौत और करीब 200 लोगों के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती होने के बाद क्षेत्रवासियों में जल संस्थान के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे को लेकर चल रहे धरना-प्रदर्शन में राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू भी शामिल हुए और प्रभावित लोगों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
धरना स्थल पर लोगों ने जल संस्थान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे घोर लापरवाही बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में बरती गई लापरवाही ने लोगों की जान को खतरे में डाल दिया है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने और विभिन्न अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती होने से ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों में भय का माहौल है।
राज्य आंदोलनकारी हरीश पनेरू ने कहा कि यदि दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण लोगों की जान गई है और सैकड़ों लोग बीमार होकर अस्पतालों में भर्ती हैं तो इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच और सुरक्षित जलापूर्ति सुनिश्चित करना संबंधित विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। लोगों का आरोप है कि समय रहते पेयजल व्यवस्था की निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जाती तो इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की स्थिति से बचा जा सकता था।
धरना प्रदर्शन में शामिल लोगों ने प्रभावित परिवारों को उचित सहायता, बीमार लोगों को बेहतर और नि:शुल्क उपचार तथा क्षेत्र में तत्काल स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही दूषित पानी की आपूर्ति के कारणों की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई।
क्षेत्र में इस घटना के बाद जनता में भारी आक्रोश है और लोगों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिम्मेदारी तय कर ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाए गए और प्रभावित क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
ज्योलीकोट में दूषित पेयजल को लेकर उपजे इस गंभीर संकट ने एक बार फिर पेयजल आपूर्ति व्यवस्था और उसकी निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन और शासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि इस मामले में जिम्मेदारी तय कर दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं और प्रभावित लोगों को कब तक राहत मिलती है।
