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सरकारी जमीनों के हस्तांतरण को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला, राहुल छिमवाल बोले- बड़े उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने की तैयारी

हल्द्वानी। कांग्रेस के नैनीताल जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल ने हल्द्वानी में प्रेस कांफ्रेंस कर प्रदेश सरकार पर सरकारी जमीनों के हस्तांतरण और कथित बंदरबांट को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बेशकीमती सरकारी जमीनों को विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से निजी हाथों में देने की प्रक्रिया चल रही है, जिसका कांग्रेस पुरजोर विरोध करेगी।

राहुल छिमवाल ने आरोप लगाया कि सरकार उत्तराखंड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) और सिडकुल के नाम पर सरकारी भूमि का हस्तांतरण कर रही है। उनके अनुसार, इन जमीनों को बड़े उद्योगपतियों और बाहरी लोगों को उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जमीन पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों और उत्तराखंड के युवाओं का होना चाहिए।

पटवा डांगर और मरचूला की जमीनों का उठाया मुद्दा

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने नैनीताल जिले के पटवा डांगर और मरचूला-कॉर्बेट क्षेत्र की जमीनों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन क्षेत्रों की बेशकीमती सरकारी भूमि को भी हस्तांतरित करने अथवा निजी उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने सरकार से इन जमीनों से संबंधित सभी प्रस्तावों और निर्णयों को सार्वजनिक करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण इन क्षेत्रों की जमीन का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है, इसकी पूरी जानकारी प्रदेश की जनता को मिलनी चाहिए। कांग्रेस ने सरकार से सरकारी भूमि के आवंटन, हस्तांतरण, लीज और संभावित बिक्री से जुड़ी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने की मांग की।

एचएमटी रानीबाग की जमीन पर भी सवाल

छिमवाल ने रानीबाग स्थित एचएमटी की जमीन को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस बेशकीमती जमीन को भी बेचने या निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार ने 2022 में एचएमटी की 45.33 एकड़ भूमि उत्तराखंड सरकार को हस्तांतरित की थी और मार्च 2026 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस भूमि पर आईटी हब विकसित करने की तैयारी की बात कही थी। 

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि एचएमटी रानीबाग की जमीन का इस्तेमाल प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और स्थानीय विकास की योजनाओं में किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि इस भूमि को लेकर वर्तमान में क्या योजना है और भविष्य में इसका उपयोग किस प्रकार किया जाएगा।

सरकार से फैसले वापस लेने की मांग

राहुल छिमवाल ने कहा कि उत्तराखंड की सरकारी जमीनें सीमित हैं और उनका उपयोग प्रदेश के हित में होना चाहिए। उन्होंने सरकार से सरकारी जमीनों के हस्तांतरण से जुड़े फैसलों की समीक्षा करने तथा ऐसे निर्णयों को वापस लेने की मांग की, जिनसे स्थानीय हित प्रभावित होने की आशंका है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारी संपत्तियों और जमीनों के मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और पूरे प्रदेश में इस विषय को उठाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी।

गौरतलब है कि यूआईआईडीबी को लेकर हाल में उठे सवालों पर राज्य सरकार ने कहा है कि बोर्ड को 7,000 बीघा जमीन दिए जाने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत है और उसके पास अब तक 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध हुई है। 

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