सगी बेटी ही बनी विधवा मां की सबसे बड़ी दुश्मन, सुपारी देकर कराई हत्या! कातिल आयुषी की रूह कंपा देने वाली साजिश
सरकारी नौकरी और संपत्ति के लालच में बेटी ने की मां की हत्या,रिश्तों को शर्मसार करने वाली वारदात
तीन महीने तक रची गई साजिश; एक्सीडेंट का रूप देकर हत्या छिपाने की थी कोशिश
राजस्थान से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक 23 वर्षीय युवती पर अपनी ही मां की हत्या की साजिश रचने और 7 लाख रुपये की सुपारी देकर पेशेवर बदमाशों से हत्या करवाने का आरोप लगा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि बेटी ने सरकारी नौकरी और संपत्ति हासिल करने के लालच में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिलाया। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी बेटी समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार है।
पुलिस के अनुसार, 45 वर्षीय नीरज शर्मा के पति विजय कुमार शर्मा अदालत में एलडीसी के पद पर कार्यरत थे। करीब एक वर्ष पहले उनकी मृत्यु के बाद परिवार आर्थिक संकट में आ गया था। सरकार ने नियमों के तहत नीरज शर्मा को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी, ताकि वह अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें। जांच में सामने आया कि यही नौकरी उनकी बेटी आयुषी के लालच का कारण बन गई। आरोप है कि आयुषी को विश्वास था कि मां की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति और पूरी संपत्ति उसके हिस्से में आ जाएगी।
पुलिस के मुताबिक, यह हत्या अचानक नहीं हुई, बल्कि पिछले तीन महीनों से इसकी सुनियोजित साजिश रची जा रही थी। आयुषी ने अपने सगे चाचा मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि के साथ मिलकर मां को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। हत्या को सड़क हादसे का रूप देने के लिए पहले एक किराए की एसयूवी से कोशिश की गई, लेकिन योजना सफल नहीं हो सकी। इसके बाद दूसरी गाड़ी की व्यवस्था की गई और कई दिनों तक नीरज शर्मा की दिनचर्या तथा आने-जाने के रास्तों की रेकी की जाती रही।
जब परिवार के लोग अपने मंसूबे में सफल नहीं हुए तो आरोपियों ने भरतपुर के बयाना निवासी हेमंत शर्मा नामक बदमाश से 7 लाख रुपये में हत्या का सौदा किया। हेमंत ने अपने चार साथियों को भी इस वारदात में शामिल कर लिया।
पुलिस के अनुसार, 3 जुलाई 2026 की शाम करीब 4:45 बजे नीरज शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को कोचिंग छोड़कर पैदल घर लौट रही थीं। इसी दौरान पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने तेज रफ्तार एसयूवी से उन्हें पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। बताया गया कि वाहन की रफ्तार करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटा थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नीरज शर्मा करीब 100 फीट दूर जा गिरीं और गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी वाहन समेत फरार हो गए।
शुरुआत में पुलिस ने इस घटना को सामान्य ‘हिट एंड रन’ दुर्घटना माना था, लेकिन मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब मृतका के भाई राकेश शर्मा ने पुलिस को लिखित शिकायत देकर अपनी भांजी आयुषी, मोहन स्वरूप और बलराम पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने पुलिस को बताया कि नीरज शर्मा ने अपनी मौत से पहले कई बार जान का खतरा होने की आशंका जताई थी और कहा था कि परिवार के कुछ लोग नौकरी और संपत्ति के लिए उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं।
शिकायत के बाद पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और संदिग्ध एसयूवी की पहचान की। इसके साथ ही आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मोबाइल लोकेशन की जांच की गई। जांच में घटना से पहले और वारदात के दौरान आरोपियों के बीच लगातार संपर्क होने के सबूत मिले, जिससे पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया।
पुलिस ने मुख्य आरोपी आयुषी, उसके चाचा मोहन स्वरूप, सुपारी किलर हेमंत शर्मा तथा उसके चार साथियों को गिरफ्तार कर लिया है। वारदात में प्रयुक्त एसयूवी भी बरामद कर ली गई है। वहीं, आरोपी बलराम उर्फ रवि अभी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साजिश से जुड़े सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जांच में इसे सड़क हादसा मानने वाली यह घटना अब राज्य के चर्चित हत्याकांडों में शामिल हो गई है, जिसने लालच में टूटते पारिवारिक रिश्तों की भयावह तस्वीर सामने रख दी है।
