भारत सरकार ने जारी किया नियुक्ति पत्र, पांच वर्ष का होगा कार्यकाल; पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के क्षेत्र में डॉ. भट्ट के शोध कार्यों को मिली नई पहचान
नैनीताल। डॉ. इंद्र दत्त भट्ट को भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान का निदेशक नियुक्त किया गया है। इस संबंध में भारत सरकार के संबंधित विभाग की ओर से आज नियुक्ति पत्र जारी किया गया। डॉ. भट्ट वर्तमान में संस्थान में कार्यकारी निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। अब उन्हें नियमित रूप से निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनका कार्यकाल पांच वर्ष का होगा।
देश के प्रमुख पर्यावरण संस्थानों में शामिल इस संस्थान के माध्यम से हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और सतत विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। डॉ. भट्ट की नियुक्ति को पर्यावरण विज्ञान और हिमालयी पारिस्थितिकी के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव तथा उल्लेखनीय शोध योगदान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उच्च शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय शोध का व्यापक अनुभव
डॉ. इंद्र दत्त भट्ट ने एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय, श्रीनगर, उत्तराखंड से वनस्पति विज्ञान में स्नातक एवं स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 2001 में इसी विश्वविद्यालय से पादप कार्यिकी में पीएचडी की उपाधि हासिल की।
उनके शैक्षणिक और शोध अनुभव में अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने अमेरिका के ह्यूस्टन स्थित एम.डी. एंडरसन कैंसर सेंटर में क्लेटन फाउंडेशन के अंतर्गत पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप पूरी की। इसके अतिरिक्त उन्होंने जापान के निगाता में जापान सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ साइंस (जेएसपीएस) के अंतर्गत पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप भी प्राप्त की।
डॉ. भट्ट ने अपने वैज्ञानिक करियर में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह वैज्ञानिक ‘जी’ के पद पर कार्यरत रहे हैं और वर्तमान में संस्थान में कार्यकारी निदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। इससे पहले उन्हें डीएसटी-युवा वैज्ञानिक के रूप में भी कार्य करने का अवसर मिला।
पादप कार्यिकी और हिमालयी जैव विविधता पर महत्वपूर्ण शोध
डॉ. भट्ट का शोध कार्य पादप कार्यिकी, फाइटोकेमिस्ट्री, औषधीय एवं सुगंधित पौधों के प्रवर्धन और ऊतक संवर्धन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा है। इसके अलावा उन्होंने आनुवंशिक विविधता, जैव प्रौद्योगिकी, हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता, पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा समुदाय आधारित संरक्षण के क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय शोध किया है।
उनके शोध कार्यों का उद्देश्य हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की चुनौतियों को समझना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना और वैज्ञानिक अनुसंधान के माध्यम से पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान तलाशना रहा है।
वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उनके योगदान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं तथा कई पुस्तकों के लेखन में योगदान दे चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने दर्जनों पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है, जिससे उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थाओं में भी योगदान
डॉ. इंद्र दत्त भट्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वैज्ञानिक गतिविधियों में योगदान दिया है। वह जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय निकायों से जुड़े कार्यों में योगदान कर चुके हैं।
इसके अलावा उनका नाम स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर की दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में भी शामिल है। यह उपलब्धि उनके शोध कार्यों और वैज्ञानिक योगदान की अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाती है।
कूटा सहित शिक्षाविदों ने जताई खुशी
डॉ. इंद्र दत्त भट्ट को संस्थान का निदेशक नियुक्त किए जाने पर कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) सहित शिक्षाविदों और अकादमिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
कूटा अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी, प्रो. नीलू, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. युगल, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. कुबेर गिंती, प्रो. अनिल बिष्ट, डॉ. शिवांगी, डॉ. दीपिका गोस्वामी और डॉ. अशोक कुमार ने डॉ. भट्ट की नियुक्ति पर हर्ष व्यक्त किया।
वहीं, एलुमनी सेल की ओर से डॉ. बी.एस. कालाकोटी, प्रो. संजय पंत, डॉ. एस.एस. सामंत, डॉ. जी.सी. जोशी, ज्योति कांडपाल, डॉ. मीना जोशी और डॉ. भुवन आर्य ने भी उन्हें बधाई दी।
शिक्षाविदों ने उम्मीद जताई कि डॉ. भट्ट के नेतृत्व में संस्थान हिमालयी पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के अध्ययन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में नए आयाम स्थापित करेगा। उनकी नियुक्ति से संस्थान की वैज्ञानिक एवं शोध गतिविधियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

