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ब्रेकिंग न्यूज़ : 9 साल पुराने VPDO भर्ती मामले में ED की एंट्री से हड़कंप, पूर्व CM हरीश रावत के करीबी रहे चंदन जीना जांच के घेरे में, ED की कार्रवाई के बाद उत्तराखंड की सियासत गरमाई

ब्रेकिंग न्यूज : UKSSSC घोटाले में फंसे हरीश रावत के करीबी चंदन सिंह जीना, ED की रेड में 32 लाख कैश और सोना बरामद

UKSSSC VPDO भर्ती घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई: 9 साल बाद फिर खुली जांच की परतें, हरीश रावत के पूर्व OSD चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी,  नकदी, सोना और महंगी घड़ियों की कथित बरामदगी से बढ़ी हलचल

देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित UKSSSC VPDO भर्ती परीक्षा-2016 मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में हलचल पैदा कर दी है। करीब नौ साल पुराने इस मामले में ED ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग और परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी से जुड़े आरोपों की जांच के तहत कार्रवाई की है। इस कार्रवाई में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के कार्यकाल में उनके करीबी रहे और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD व फर्स्ट पीए की जिम्मेदारी निभा चुके चंदन सिंह जीना का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप की संभावना बढ़ गई है। हालांकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई और बरामदगी से जुड़े आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

कौन हैं चंदन सिंह जीना?

चंदन सिंह जीना उत्तराखंड की नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में चर्चित नाम रहे हैं। वर्ष 2014 से 2017 तक हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहने के दौरान वह मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े रहे और OSD तथा फर्स्ट पीए के रूप में जिम्मेदारियां संभालते रहे।

राजनीतिक हलकों में उन्हें हरीश रावत का करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता था। मुख्यमंत्री कार्यालय में कार्यरत रहने के कारण शासन और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों में उनकी भूमिका को लेकर अक्सर चर्चा होती रही है।

VPDO परीक्षा-2016 मामले में ED की कार्रवाई

बताया जा रहा है कि ED ने 10 सितंबर को UKSSSC की VPDO परीक्षा-2016 से जुड़े कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कार्रवाई की। जांच का आधार विजिलेंस थाने में दर्ज FIR और उससे जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसी की पड़ताल कथित तौर पर परीक्षा की OMR शीट के प्रोसेसिंग कार्य और परीक्षा परिणामों में संभावित हेराफेरी के आरोपों से जुड़ी है। आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी एक निजी कंपनी के माध्यम से परिणामों में कथित रूप से गड़बड़ी की गई और इसके बदले आर्थिक लेनदेन हुआ।

ED अब इसी कथित धन के लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। जांच के दौरान कथित तौर पर चंदन सिंह जीना से संबंधित परिसरों की भी तलाशी ली गई।

नकदी, सोना और महंगी घड़ियों की बरामदगी का दावा

कार्रवाई के दौरान ED द्वारा चंदन सिंह जीना के ठिकाने से 32 लाख रुपये नकद, करीब 200.5 ग्राम सोना और 12 महंगी ब्रांडेड घड़ियां बरामद किए जाने का दावा किया गया है।

जांच एजेंसी इन संपत्तियों और नकदी के स्रोत की जांच कर रही है। मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के दौरान इन बरामद वस्तुओं और कथित आर्थिक लेनदेन के संबंध में क्या साक्ष्य सामने आते हैं और संबंधित पक्ष की ओर से क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।

हरीश रावत से संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज

इस कार्रवाई के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत से चंदन सिंह जीना की नजदीकियों को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हरीश रावत उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हैं। उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान चंदन सिंह जीना मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD के रूप में कार्यरत रहे थे।

भाजपा इस मामले को लेकर तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर सवाल उठा सकती है, जबकि किसी भी व्यक्ति की आपराधिक या कानूनी जिम्मेदारी जांच और न्यायालय के निष्कर्ष के आधार पर ही तय होगी।

यह भी स्पष्ट है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी का मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़ा होना अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। ED की वर्तमान जांच में किन व्यक्तियों की क्या भूमिका पाई जाती है, इसका खुलासा जांच आगे बढ़ने और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही होगा।

त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम क्यों हो रहा है चर्चा में?

उत्तराखंड में वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बने थे। उनके कार्यकाल में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान सामने आए विभिन्न मामलों और भर्ती से जुड़े आरोपों की जांच को लेकर कदम उठाए गए थे।

वर्तमान में हरिद्वार से सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम इस मामले में इसलिए चर्चा में है क्योंकि वर्ष 2017 के बाद तत्कालीन सरकार द्वारा पूर्ववर्ती कार्यकाल से जुड़े कई मामलों की जांच की दिशा में कार्रवाई की गई थी।

अब VPDO भर्ती परीक्षा-2016 से जुड़े पुराने मामले में ED की सक्रियता को भाजपा राजनीतिक रूप से हरीश रावत सरकार के कार्यकाल में कथित अनियमितताओं से जोड़कर देख रही है।

नौ साल पुराने मामले ने फिर बढ़ाई राजनीतिक हलचल

UKSSSC भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामले उत्तराखंड में लंबे समय से संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहे हैं। बेरोजगार युवाओं के भविष्य से जुड़े होने के कारण भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता के आरोप हमेशा बड़े राजनीतिक मुद्दे बनते रहे हैं।

VPDO परीक्षा-2016 से जुड़े मामले में ED की ताजा कार्रवाई ने करीब नौ साल पुराने प्रकरण को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब जांच का सबसे अहम पहलू यह होगा कि कथित OMR हेराफेरी, परीक्षा परिणामों और संदिग्ध आर्थिक लेनदेन के बीच जांच एजेंसी को क्या ठोस साक्ष्य मिलते हैं।

मामले में आगे ED की जांच, संबंधित पक्षों के बयान और संभावित कानूनी कार्रवाई पर उत्तराखंड की राजनीति की नजर रहेगी। जांच पूरी होने तक इस प्रकरण में सामने आए आरोपों को जांचाधीन माना जाना चाहिए और अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसी व न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।