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उत्तराखंड की पारंपरिक ऐपण कला को सहेजने का संकल्प, साह-चौधरी समाज ने आयोजित की प्रतियोगिता

नैनीताल में ऐपण कला प्रतियोगिता का भव्य आयोजन, बच्चों और महिलाओं ने पारंपरिक कला के रंगों से सजाई सांस्कृतिक विरासत

ऐपण कला के जरिए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की पहल, 45 विद्यार्थियों और 15 महिलाओं ने लिया भाग

वृंदावन पब्लिक स्कूल में ऐपण प्रतियोगिता का आयोजन, अस्मिता परिहार और निहारिका साह ने मारी बाजी

नैनीताल। उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से शनिवार को नैनीताल में ऐपण कला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। साह-चौधरी समाज नैनीताल एवं वृंदावन पब्लिक स्कूल नैनीताल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 13वीं चंद्र लाल साह विद्यालय स्तरीय ऐपण प्रतियोगिता और तीसरी राजेंद्र लाल साह ओपन ऐपण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

वृंदावन पब्लिक स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में नैनीताल और हल्द्वानी के विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में कुल 45 विद्यार्थियों ने भाग लिया, जबकि ओपन प्रतियोगिता में नैनीताल शहर की 15 महिलाओं ने पारंपरिक ऐपण कला के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और हुनर का परिचय दिया।

पारंपरिक ऐपण कला में दिखी रचनात्मकता

विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में जीजीआईसी नैनीताल, ऐशडेल स्कूल, सनवाल स्कूल, मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर, ऑल सेंट्स कॉलेज, नगर पालिका स्कूल काठगोदाम तथा भारतीय शहीद सैनिक स्कूल के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

प्रतियोगिता के दौरान बच्चों ने ऐपण कला के माध्यम से उत्तराखंड की लोक संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक कलात्मक शैली को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों की कलाकृतियों में पारंपरिक प्रतीकों, बारीकियों और रचनात्मक सोच की झलक देखने को मिली। विशेष रूप से ऑल सेंट्स कॉलेज नैनीताल और हल्द्वानी से आए विद्यार्थियों ने ऐपण कला के प्रति अपनी समझ और रचनात्मकता से उपस्थित लोगों को प्रभावित किया।

आधुनिकता के दौर में बच्चों की पारंपरिक कला के प्रति रुचि ने आयोजन को खास बना दिया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर मिला।

कुलसचिव डॉ. रितेश साह ने बढ़ाया प्रतिभागियों का उत्साह

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुमाऊं विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलसचिव श्री रितेश साह रहे। उन्होंने विद्यार्थियों की कलाकृतियों का अवलोकन कर उनकी सराहना की और कहा कि आधुनिक समय में भी बच्चों का अपनी संस्कृति और पारंपरिक कलाओं से जुड़ाव बेहद सराहनीय है।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के साथ ही पारंपरिक लोक कलाओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे प्रयासों से बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान और गौरव की भावना विकसित होती है।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में ताल चैनल की प्रबंधक श्रीमती ईशा साह, किंग प्रेस के प्रबंधक श्री घनश्याम लाल साह, भारत टेंट हाउस के प्रबंधक श्री कान्हा साह तथा चौधरी कंस्ट्रक्शन के प्रबंधक श्री विमल चौधरी मौजूद रहे। समाज के कार्यक्रमों में निरंतर सहयोग देने के लिए सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

विद्यालय स्तरीय प्रतियोगिता में अस्मिता परिहार प्रथम

विद्यालय स्तरीय ऐपण प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे—

प्रथम स्थान: अस्मिता परिहार — सनवाल स्कूल

द्वितीय स्थान: गीतांजलि हल्सी — मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर

तृतीय स्थान: दिव्यांशी बोहरा — सनवाल स्कूल

चतुर्थ स्थान (सांत्वना पुरस्कार): पंखुड़ी गोस्वामी — मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर

पंचम स्थान (सांत्वना पुरस्कार): भारती जोशी — सनवाल स्कूल

षष्ठम स्थान (सांत्वना पुरस्कार): यामिनी राजपूत — नगर पालिका स्कूल, काठगोदाम

सप्तम स्थान (सांत्वना पुरस्कार): ज्योत्सना आर्या — मोहन लाल साह बाल विद्या मंदिर

अष्टम स्थान (सांत्वना पुरस्कार): आयुषी — नगर पालिका स्कूल, काठगोदाम

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के प्रदर्शन और प्राप्त अंकों के आधार पर सनवाल स्कूल ने टीम चैंपियनशिप अपने नाम की। विद्यालय की इस उपलब्धि से प्रतिभागियों और शिक्षकों में उत्साह देखने को मिला।

ओपन ऐपण प्रतियोगिता में निहारिका साह ने हासिल किया पहला स्थान

तीसरी राजेंद्र लाल साह ओपन ऐपण प्रतियोगिता में नैनीताल की 15 महिलाओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। महिलाओं ने पारंपरिक ऐपण शैली के माध्यम से लोक कला के प्रति अपनी रुचि और कौशल का परिचय दिया।

ओपन प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे—

प्रथम पुरस्कार: निहारिका साह

द्वितीय पुरस्कार: अंकिता रौतेला

तृतीय पुरस्कार: याशवी रावत

चतुर्थ पुरस्कार: कमला धामी

पंचम पुरस्कार: अंजलि बुधलाकोटी

प्रतियोगिता के विजेताओं को नकद पुरस्कार और ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया गया।

निर्णायक मंडल ने कला की बारीकियों के आधार पर किया मूल्यांकन

प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका  बृजमोहन जोशी,  शीला साह,  सुधा साह,  जानकी साह और  मंजू साह ने निभाई। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों की कलात्मक अभिव्यक्ति, पारंपरिक शैली, रचनात्मकता और ऐपण कला की बारीकियों के आधार पर उनकी प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।

कार्यक्रम का संचालन  शैलेन्द्र साह ने किया। आयोजन के सफल समापन पर साह-चौधरी समाज के अध्यक्ष  मनोज साह और सचिव  शैलेन्द्र चौधरी ने सभी प्रतिभागियों, उनके साथ आए शिक्षकों, अतिथियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम की संयोजक  राखी साह और सह-संयोजक  भारती साह के योगदान की भी सराहना की गई।

इस अवसर पर हितेश साह, हर्षित साह, मोहित लाल साह, किशन लाल साह, सुरेश लाल साह, सुरेश चौधरी, विमल चौधरी, बिमल साह, मनोज साह, ललित मोहन साह, आलोक साह, मोहित साह, अमिता साह, ज्योति चौधरी, दीपा चौधरी, मनीष साह, दिग्विजय साह, दिग्विजय चौधरी सहित विद्यालय की शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं।

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