213 शोध पत्र, 15 पुस्तकें और 50 शोधार्थियों को पीएचडी कराने का अनुभव; जैव विविधता एवं हिमालयी पर्यावरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान
नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी को शिक्षा शास्त्र संकाय का संकायाध्यक्ष (डीन एजुकेशन) नियुक्त किया गया है। कुलपति के अनुमोदन के बाद विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने उनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रो. तिवारी की इस नियुक्ति को उनके लंबे शैक्षणिक अनुभव, शोध कार्यों और विश्वविद्यालय में विभिन्न प्रशासनिक एवं अकादमिक दायित्वों के निर्वहन से जोड़कर देखा जा रहा है।
प्रो. ललित तिवारी पिछले 16 वर्षों से प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षण, शोध और प्रशासन के क्षेत्र में उनके व्यापक अनुभव के साथ जैव विविधता, हिमालयी पर्यावरण तथा औषधीय पौधों के संरक्षण और अध्ययन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनकी नियुक्ति से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं शोध कार्यों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं प्रो. तिवारी
प्रो. तिवारी कुमाऊं विश्वविद्यालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। इनमें निदेशक शोध, निदेशक विजिटिंग प्रोफेसर, विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी), इग्नू कार्यक्रम समन्वयक, एनएसएस समन्वयक, उप परीक्षा नियंत्रक, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) समन्वयक तथा राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी जैसे दायित्व शामिल हैं। इन पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं प्रशासनिक गतिविधियों में योगदान दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित हुए 213 शोध पत्र
शोध के क्षेत्र में प्रो. तिवारी की उपलब्धियां उल्लेखनीय हैं। उनके अब तक 213 शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय जर्नलों में प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त उनके 30 पुस्तक अध्याय प्रकाशित हुए हैं। उनके नाम 15 पुस्तकें और चार संपादित पुस्तकें भी हैं। उन्होंने उत्तराखंड की संस्कृति से संबंधित 10 पत्रिकाओं का संपादन भी किया है। वहीं, विभिन्न विषयों पर उनके 100 से अधिक लोकप्रिय लेख प्रकाशित हो चुके हैं।
उनके शोध कार्यों का प्रमुख केंद्र जैव विविधता, हिमालयी पारिस्थितिकी, पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों से जुड़े विषय रहे हैं। इन क्षेत्रों में उनके अकादमिक योगदान ने उन्हें शोध एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान दिलाई है।
50 शोधार्थियों को पीएचडी कराने का अनुभव
प्रो. ललित तिवारी ने शोध निर्देशन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके निर्देशन और सह-निर्देशन में अब तक 50 विद्यार्थी पीएचडी तथा दो शोधार्थी एमफिल की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। इसके साथ ही वह 60 से अधिक आमंत्रित व्याख्यान दे चुके हैं। उनका शैक्षणिक अनुभव और शोध मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों एवं युवा शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से मिली पहचान
प्रो. तिवारी को उनके शैक्षणिक, शोध एवं सामाजिक योगदान के लिए कई पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उन्हें उत्तराखंड रत्न, टीचर ऑफ द ईयर, बेस्ट डायरेक्टर तथा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए देवभूमि उत्कृष्टता पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इसके अलावा उन्हें डॉ. बी.आर. जैदी अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
राष्ट्रीय सेवा योजना में उनके योगदान के लिए उन्हें दो बार राज्यपाल के हाथों प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पहचान है। वह फेलो ऑफ रॉयल सोसाइटी ऑफ बायोलॉजी, लंदन, फेलो ऑफ लिनियन सोसाइटी, लंदन तथा फेलो ऑफ इंडियन बॉटनिकल सोसाइटी हैं।
पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा में भी सक्रिय
शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों के साथ प्रो. तिवारी पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह अब तक 50 हजार पौधे लगा चुके हैं और 20 बार रक्तदान कर चुके हैं। उनके ये प्रयास पर्यावरण के प्रति जागरूकता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
प्रो. ललित तिवारी की शिक्षा शास्त्र संकायाध्यक्ष के पद पर नियुक्ति उनके लंबे शैक्षणिक अनुभव, शोध उपलब्धियों और विश्वविद्यालय में निभाई गई विभिन्न जिम्मेदारियों के मद्देनजर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनकी नियुक्ति से शिक्षा, शोध और अकादमिक गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

