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नैनीताल में चित्रकला प्रतियोगिता में दिखी कुमाऊंनी संस्कृति की झलक, 950 स्कूली बच्चों ने रंगों से उकेरी अपनी सांस्कृतिक विरासत

चित्रकला प्रतियोगिता में दिखी कुमाऊंनी संस्कृति की झलकसंस्कृति बनी प्रतियोगिता की थीम

रंगों में सजी उत्तराखंड की संस्कृति, नैनीताल में बच्चों ने पेंटिंग से दिया विरासत बचाने का संदेश

पिछौड़ा, पारंपरिक गहने और कुमाऊंनी वेशभूषा बनी बच्चों की पेंटिंग का आकर्षण

रिपोर्टर: गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में बच्चों की कलात्मक प्रतिभा को मंच देने और उत्तराखंड की लोक संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने के उद्देश्य से चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। न्यू क्लब में आयोजित इस प्रतियोगिता में नगर के विभिन्न स्कूलों के लगभग 950 छात्र-छात्राएं प्रतिभाग कर रहे हैं। प्रतियोगिता की खास बात यह है कि बच्चों ने अपनी पेंटिंग के माध्यम से कुमाऊंनी वेशभूषा, पारंपरिक आभूषणों, पिछौड़े और तीज-त्योहारों को खूबसूरती से उकेरकर अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति लगाव प्रदर्शित किया।नैनीताल में चित्रकला प्रतियोगिता में दिखी कुमाऊंनी संस्कृति की झलक, 950 स्कूली बच्चों ने रंगों से उकेरी अपनी सांस्कृतिक विरासत

 नैनीताल के न्यू क्लब में आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा है। 25 से 29 अक्टूबर तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएं अपनी रचनात्मकता और कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रतियोगिता में इस बार कुमाऊंनी संस्कृति को प्रमुख विषय बनाया गया है, ताकि बच्चे अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को करीब से जान सकें।नैनीताल में चित्रकला प्रतियोगिता में दिखी कुमाऊंनी संस्कृति की झलक, 950 स्कूली बच्चों ने रंगों से उकेरी अपनी सांस्कृतिक विरासत

आयोजन में बच्चों के लिए अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं। ओपन कैटेगरी में प्रतिभागियों को अपनी पसंद के किसी भी विषय पर चित्र बनाने की स्वतंत्रता दी गई है, जबकि कक्षा चार से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग श्रेणियां रखी गई हैं। इससे विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों की प्रतिभा और रचनात्मकता को बेहतर तरीके से परखने का अवसर मिल रहा है। प्रतियोगिता में आसपास के क्षेत्रों के स्कूलों को भी आमंत्रित किया गया है।

प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही छात्रा मीनाक्षी ने अपनी पेंटिंग के जरिए कुमाऊंनी महिलाओं की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषणों को प्रदर्शित किया। उनका कहना है कि कुमाऊं की पहचान यहां का पिछौड़ा, पारंपरिक गहने और महिलाओं की पारंपरिक पोशाक है। आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते प्रभाव के बीच धीरे-धीरे लोग अपनी सांस्कृतिक पहचान से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में चित्रकला के माध्यम से अपनी संस्कृति को प्रदर्शित करना और लोगों को उसके महत्व से परिचित कराना जरूरी है।

प्रतिभागियों का कहना है कि बाहरी संस्कृतियों को अपनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसके साथ अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों को भी सहेजकर रखना चाहिए। कला ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सकती है और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकती है।

प्रतियोगिता की आयोजक संस्था की सचिव अंजू शाह जगाती ने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर देना और उनमें उत्तराखंड की संस्कृति के प्रति रुचि पैदा करना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को कुमाऊंनी संस्कृति पर आधारित विषय देने का मकसद उन्हें अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। बच्चों में अपनी संस्कृति के प्रति लगाव देखकर आयोजक उत्साहित हैं।

प्रतियोगिता में विशेष अतिथि के रूप में हल्द्वानी स्थित इंस्पिरेशन स्कूल के कंटेम्पररी आर्टिस्ट विवेक चंद्र बिष्ट को आमंत्रित किया गया है। प्रतियोगिता के विजेताओं को आकर्षक ट्रॉफियां देकर सम्मानित किया जाएगा।

वीओ-4: कुल मिलाकर, नैनीताल में आयोजित यह चित्रकला प्रतियोगिता केवल रंगों और रेखाओं का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने की एक सार्थक पहल भी है। बच्चों की कल्पनाओं में उभरती कुमाऊंनी संस्कृति की तस्वीरें यह संदेश दे रही हैं कि आधुनिकता के साथ कदमताल करते हुए भी अपनी जड़ों, परंपराओं और विरासत को जीवित रखना बेहद जरूरी है।

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