उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने BJP पर देश को बांटने का लगाया आरोप
नई दिल्ली। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरिश रावत ने वंदे मातरम् के गायन को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद पर कांग्रेस का पक्ष रखा है। न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि भाजपा हर चीज का इस्तेमाल देश को बांटने के लिए करती है और वंदे मातरम् का इस्तेमाल भी राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने वंदे मातरम् को जो महत्व दिया था, उसे कभी नकारा नहीं जा सकता।
कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से वंदे मातरम् के पहले दो छंद गाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए हरिश रावत ने कहा कि कांग्रेस के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में वंदे मातरम् की भूमिका को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस कार्यसमिति में सुभाष चंद्र बोस, आचार्य नरेंद्र देव, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे दिग्गजों से जुड़े विचारों का प्रभाव था, उसी दौर में महात्मा गांधी की आज्ञा से एक उपसमिति गठित कर इस विषय पर निर्णय लिया गया था।
हरिश रावत ने सवाल उठाते हुए कहा कि उस समय लिए गए फैसले को आज कोई कैसे बदलने का साहस कर सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लिए स्वतंत्रता आंदोलन का इतिहास महज इतिहास नहीं, बल्कि उसकी राजनीतिक और वैचारिक विरासत का हिस्सा है।
‘1937 के कांग्रेस के फैसले को आज की कांग्रेस नहीं बदल सकती’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1937 में कांग्रेस द्वारा लिए गए फैसले को पलटने का काम आज की कांग्रेस नहीं कर सकती। उन्होंने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों का देश की आजादी के आंदोलन से कोई सीधा तारतम्य नहीं रहा, वे इस मुद्दे को अलग नजरिए से देख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ऐसा फैसला ले सकते हैं, क्योंकि उनके अनुसार उनका स्वतंत्रता आंदोलन से वैसा संबंध नहीं रहा है जैसा कांग्रेस का रहा है। हरिश रावत ने कहा कि कांग्रेस का स्वतंत्रता आंदोलन से गहरा संबंध रहा है, इसलिए वह अपनी ऐतिहासिक विरासत को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
15 अगस्त के बाद तेज हुआ वंदे मातरम् विवाद
वंदे मातरम् को लेकर विवाद 15 अगस्त के कार्यक्रमों के बाद और गहरा गया। कांग्रेस कार्यालय में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण के दौरान वंदे मातरम् का गायन किया गया। हालांकि कांग्रेस नेताओं की ओर से इसके शुरुआती दो छंद ही गाए जाने को लेकर भाजपा ने सवाल उठाए।
कांग्रेस के शीर्ष नेताओं सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे सहित अन्य नेताओं द्वारा वंदे मातरम् के शुरुआती दो छंद गाए जाने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। बाद में गोवा में आयोजित कांग्रेस के एक कार्यक्रम में भी वंदे मातरम् के दो छंद गाए जाने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।
भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए, जबकि कांग्रेस ने इसका जवाब देते हुए कहा कि वह उसी परंपरा के अनुरूप वंदे मातरम् का गायन कर रही है, जिसे महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के दौर में अपनाया गया था।
राजनीतिक बहस में बदला राष्ट्रगीत से जुड़ा मुद्दा
वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब केवल गायन की अवधि या छंदों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके राजनीतिक और ऐतिहासिक पक्ष पर भी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस जहां इसे स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक परंपरा से जोड़कर देख रही है, वहीं भाजपा कांग्रेस के रुख पर सवाल उठा रही है।
हरिश रावत के बयान के बाद इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
रावत ने स्पष्ट संकेत दिया कि कांग्रेस अपनी ऐतिहासिक विरासत और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लिए गए निर्णयों से पीछे हटने के पक्ष में नहीं है।
