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छात्रसंघ चुनाव में महिला आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाएं हाई कोर्ट ने खारिज कीं, सरकार के फैसले पर लगी मुहर

कुमाऊं विश्वविद्यालय समेत प्रदेश के छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं के लिए आरक्षण का मामला; हाई कोर्ट ने सरकार के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को किया निरस्त

रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला

नैनीताल। उत्तराखंड में छात्रसंघ चुनावों को लेकर चल रही कानूनी जंग पर शुक्रवार को नैनीताल हाई कोर्ट में महत्वपूर्ण फैसला आया। छात्रसंघ चुनाव में छात्राओं के लिए आरक्षण लागू किए जाने तथा चुनाव प्रक्रिया को लेकर दाखिल की गई विभिन्न याचिकाओं को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।

अदालत के फैसले के बाद छात्रसंघ चुनावों में महिला आरक्षण को लेकर बनी असमंजस की स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से राज्य सरकार द्वारा छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं के लिए आरक्षण तय किए जाने के संबंध में जारी शासनादेश को चुनौती दी गई थी।

याचिकाओं में आरक्षण व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई थी। साथ ही चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद आरक्षण संबंधी शासनादेश जारी किए जाने पर भी सवाल उठाए गए थे।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि छात्रसंघ चुनाव की तारीखों की घोषणा 10 सितंबर को कर दी गई थी, जबकि आरक्षण से संबंधित शासनादेश 18 सितंबर को जारी किया गया। ऐसे में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के आठ दिन बाद आरक्षण संबंधी आदेश जारी करने को लेकर भी आपत्ति जताई गई। याचिकाओं में कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में इस प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकता।

कुछ याचिकाओं में कुमाऊं विश्वविद्यालय की स्वायत्तता का मुद्दा भी उठाया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि कुमाऊं विश्वविद्यालय एक स्वायत्त संस्था है और छात्रसंघ चुनाव के संबंध में सरकार की ओर से सीधे आदेश जारी करने के अधिकार पर सवाल उठाया गया।

वहीं, आरक्षण की व्यवस्था को लेकर भी याचिकाओं में आपत्ति दर्ज की गई थी। छात्रसंघ के कुछ पदों को छात्राओं के लिए आरक्षित किए जाने, जबकि अध्यक्ष और सचिव जैसे प्रमुख पदों पर आरक्षण लागू नहीं किए जाने को भी चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इस व्यवस्था को समानता के अधिकार और चुनाव प्रक्रिया के लिहाज से उचित नहीं बताया था।

मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से अदालत के समक्ष अपने-अपने तर्क रखे गए। राज्य सरकार की ओर से आरक्षण तय करने और इस संबंध में शासनादेश जारी करने के अधिकार का पक्ष रखा गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सभी संबंधित याचिकाओं को खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट के इस फैसले के साथ छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं के लिए आरक्षण लागू करने के राज्य सरकार के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। कुमाऊं विश्वविद्यालय और उससे संबद्ध महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया अब निर्धारित व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ने की स्थिति में है।

गौरतलब है कि कुमाऊं विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने भी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं के लिए 50 प्रतिशत पद आरक्षित करने के निर्णय पर मुहर लगाई थी।

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