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शारदीय नवरात्र पर मां नयना देवी के दरबार में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, जयकारों से गूंजा नैनीताल

51 शक्तिपीठों में शुमार मां नयना देवी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़, देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचकर कर रहे पूजा-अर्चना

रिपोर्टर : गुड्डू सिंह ठठोला 

नैनीताल। सरोवर नगरी नैनीताल में शारदीय नवरात्र की धूम देखने को मिल रही है। नवरात्र के पावन अवसर पर प्रसिद्ध मां नयना देवी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे पर्यटक और श्रद्धालु भी मां नयना देवी के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर परिसर में दिनभर घंटियों की गूंज और मां के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।

नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। भक्त मां के दरबार में पहुंचकर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जीवन में सुख-शांति की कामना कर रहे हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां के दरबार में प्रार्थना करने वाले भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही आस्था श्रद्धालुओं को मां नयना देवी के दरबार तक खींच लाती है।

मंदिर में सुबह से ही पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो दिनभर जारी रहता है। नवरात्र के दौरान मंदिर में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ नैनीताल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को भी दर्शा रही है। श्रद्धालु मां के दर्शन कर स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। वहीं, नैनीताल घूमने पहुंचे पर्यटक भी मां नयना देवी मंदिर में माथा टेककर आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं।

मां नयना देवी मंदिर से जुड़ी है पौराणिक मान्यता

नैनीताल स्थित मां नयना देवी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने अपनी पुत्री सती और उनके पति भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। इसके बावजूद माता सती अपने पिता के घर पहुंचीं, जहां उन्हें भगवान शिव के प्रति अपमानजनक बातें सुननी पड़ीं। इससे आहत होकर माता सती ने यज्ञ कुंड में अपने प्राण त्याग दिए।

माता सती के वियोग में भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंगों को अलग किया। कहा जाता है कि इसी क्रम में माता सती की बाईं आंख नैनीताल क्षेत्र में गिरी थी। इसी मान्यता के आधार पर यहां मां नयना देवी की पूजा-अर्चना की जाती है।

देशभर में फैले शक्तिपीठों की अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं हैं। श्रद्धालु इन स्थानों पर पहुंचकर माता के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं। नैनीताल का मां नयना देवी मंदिर भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है।

नवरात्र में भक्तिमय हुआ सरोवर नगरी का माहौल

शारदीय नवरात्र के चलते नैनीताल में धार्मिक उत्साह चरम पर है। मां नयना देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही, पूजा-अर्चना और जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। भक्त मां के चरणों में शीश नवाकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। नवरात्र के इन दिनों में मंदिर में उमड़ रही भीड़ एक बार फिर मां नयना देवी के प्रति लोगों की गहरी आस्था और विश्वास को प्रदर्शित कर रही है।

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