पहाड़ी में घास काटने के दौरान हादसे का शिकार हो रही है महिलाएं 2 दिन के भीतर दो घटनाएं
लोहाघाट के सीमांत मटियानी गांव में दर्दनाक हादसा, ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद खाई से निकाला; परिवार में मचा कोहराम
लोहाघाट (चंपावत)। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए महिलाओं का जंगलों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर जाना लगातार जोखिम भरा साबित हो रहा है। चंपावत जिले के लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत मटियानी गांव में घास काटने गई एक महिला की गहरी खाई में गिरने से मौत हो गई। महिला करीब 800 मीटर गहरी खाई में जा गिरी थी। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद उसे खाई से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस दर्दनाक हादसे के बाद मृतका के परिवार में कोहराम मचा हुआ है, जबकि पूरे गांव में शोक की लहर है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मटियानी गांव निवासी 48 वर्षीय सावित्री देवी पत्नी केशव सिंह बुधवार सुबह अन्य महिलाओं के साथ जंगल में घास काटने गई थीं। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वह असंतुलित होकर लगभग 800 मीटर गहरी खाई में जा गिरीं। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनके साथ मौजूद महिलाओं ने घटना की सूचना तत्काल ग्रामीणों को दी।
ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद खाई से निकाला
हादसे की सूचना मिलते ही ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे और महिला को बचाने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। खाई की गहराई और दुर्गम रास्ते के कारण महिला को बाहर निकालना काफी चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत कर गंभीर रूप से घायल सावित्री देवी को खाई से बाहर निकाला।
घटना की सूचना मिलने पर लोहाघाट के तहसीलदार मोहिउद्दीन और राजस्व उप निरीक्षक अंकिता खाती उप जिला चिकित्सालय पहुंचे और मामले की जानकारी ली। तहसीलदार ने बताया कि मृतका का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जोशी ने भी घटना की सूचना जिलाधिकारी, लोहाघाट थाना और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को दी, ताकि मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
पति करते हैं खेती-बाड़ी, पीछे छूट गए चार बच्चे
सावित्री देवी की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतका के दो बेटे और दो बेटियां हैं। उनके पति घर पर खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार की एक सदस्य की अचानक मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद गांव में भी मातम पसरा हुआ है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मृतका के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता और मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि इस मुश्किल घड़ी में परिवार को कुछ राहत मिल सके।
पहाड़ में घास काटना महिलाओं के लिए बना जानलेवा जोखिम
यह हादसा एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े खतरों को उजागर करता है। पहाड़ के गांवों में पशुओं के लिए घास और चारा जुटाना महिलाओं की दिनचर्या का अहम हिस्सा है। इसके लिए उन्हें अक्सर घने जंगलों, संकरे रास्तों और खड़ी ढलानों पर जाना पड़ता है। ऐसे स्थानों पर जरा-सी चूक भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
बताया जा रहा है कि एक दिन पहले भी पिथौरागढ़ जिले में घास काटने के दौरान पहाड़ी से गिरने के कारण एक महिला की मौत हुई थी। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं पर्वतीय क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
मटियानी गांव की सावित्री देवी की मौत ने एक बार फिर इस कड़वी सच्चाई को सामने ला दिया है कि परिवार की जरूरतों के लिए जंगलों में घास काटने जाने वाली महिलाओं को हर दिन जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसे हादसों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

