रामनगर संयुक्त चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर सवाल, वार्डों तक पहुंचे आवारा कुत्ते; मरीजों ने लगाए लापरवाही के आरोप
अस्पताल परिसर में घूमते आवारा कुत्तों से मरीजों की सुरक्षा पर चिंता, भोजन की गुणवत्ता और दवाइयों की उपलब्धता को लेकर भी उठे सवाल
रामनगर। रामनगर के रामदत्त संयुक्त चिकित्सालय में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। देर रात अस्पताल में भर्ती मरीजों ने समय पर उपचार नहीं मिलने और अन्य अव्यवस्थाओं की शिकायत की। वहीं, अस्पताल परिसर में खुलेआम घूमते आवारा कुत्तों और मरीजों के वार्ड के आसपास उनकी मौजूदगी ने अस्पताल में भर्ती मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसके अलावा मरीजों ने अस्पताल में उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता और जरूरी दवाइयों की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
मरीजों की शिकायतों की जानकारी मिलने पर भाजपा के नगर अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह खाती देर रात करीब 11 बजे रामदत्त संयुक्त चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं। इस दौरान मरीजों को बेहतर उपचार, गुणवत्तापूर्ण भोजन और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दे सामने आए। वहीं, अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर भी चिंता जताई गई।
पेट दर्द से परेशान महिला ने उपचार में देरी का लगाया आरोप
अस्पताल में भर्ती महिला मरीज तरन्नुम ने आरोप लगाया कि पेट में तेज दर्द होने के बावजूद उन्हें करीब एक घंटे तक उचित उपचार नहीं मिला। महिला के मुताबिक, वह दर्द से परेशान थीं, लेकिन उन्हें समय पर राहत नहीं मिल सकी। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि अपने बच्चे को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से पुलिस बुलाने की धमकी दी गई। महिला की शिकायत ने अस्पताल में मरीजों के साथ व्यवहार और उपचार की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में अस्पताल प्रशासन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
अस्पताल परिसर में घूमते दिखे आवारा कुत्ते
रामदत्त संयुक्त चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के बीच परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी भी चिंता का विषय बनी हुई है। अस्पताल परिसर में कई कुत्ते घूमते और मरीजों के वार्ड के आसपास बैठे दिखाई दिए। अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और तीमारदारों के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बन सकती है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर आवारा कुत्तों की आवाजाही रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
भाजपा नगर अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह खाती ने भी अस्पताल में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं मिलने और कुछ दवाइयां बाहर से खरीदने की शिकायतें मिलने की बात कही। उन्होंने इन समस्याओं को लेकर अस्पताल प्रबंधन से बातचीत करने की बात कही, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
सीएमएस ने बताया, प्रतिदिन 500 से अधिक मरीजों की ओपीडी
मामले में रामदत्त संयुक्त चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. तपन शर्मा ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का पक्ष रखते हुए बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीजों की ओपीडी हो रही है। उन्होंने कहा कि मरीजों के लिए दवाइयां भी लगातार उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी को लेकर सीएमएस ने बताया कि मुख्य प्रवेश द्वार की ओर गेट लगाया गया है, लेकिन पोस्टमार्टम हाउस की तरफ का हिस्सा खुला हुआ है। इस रास्ते से कुत्तों के अस्पताल परिसर में आने की आशंका बनी रहती है। उन्होंने बताया कि इस ओर भी गेट लगाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे आवारा कुत्तों की आवाजाही पर रोक लगाई जा सके।
नगर पालिका को लिखा पत्र, कार्रवाई का इंतजार
सीएमएस डॉ. तपन शर्मा के अनुसार, अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए नगर पालिका को पत्र भी लिखा जा चुका है। हालांकि, उनके मुताबिक अभी तक नगर पालिका की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में अस्पताल परिसर को सुरक्षित बनाने के लिए अस्पताल प्रबंधन के साथ नगर पालिका की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने की जरूरत
रामदत्त संयुक्त चिकित्सालय में मरीजों की ओर से की गई शिकायतों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की निगरानी और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर मरीज समय पर उपचार, भोजन की गुणवत्ता और दवाइयों की उपलब्धता को लेकर शिकायत कर रहे हैं, तो दूसरी ओर अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की मौजूदगी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा रही है।
अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन मरीजों की शिकायतों की जांच कर उनके समाधान के लिए क्या कदम उठाता है। साथ ही, नगर पालिका की ओर से आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान और अस्पताल परिसर को सुरक्षित बनाने के लिए कब तक ठोस कार्रवाई की जाती है। मरीजों और उनके तीमारदारों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए इन व्यवस्थाओं में सुधार करना आवश्यक है।

