हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय की अंतर महाविद्यालय महिला बास्केटबॉल प्रतियोगिता में एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया।
डीएसए के बास्केटबॉल कोर्ट में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी ने पीएनजी कॉलेज रामनगर को अतिरिक्त समय में 60-50 अंकों से हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
निर्धारित समय में कड़ा मुकाबला होने के बाद अतिरिक्त समय में हल्द्वानी की टीम ने बेहतर खेल का प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की।
नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने किया प्रतियोगिता का उद्घाटन
प्रतियोगिता का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. सरस्वती खेतवाल ने रिबन काटकर किया। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के साथ-साथ मानसिक क्षमता को भी बेहतर बनाते हैं। खेल युवाओं के लिए बेहतर भविष्य बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ प्रतियोगिताओं में भाग लेने और निरंतर अभ्यास करने का आह्वान किया।
डीएसबी परिसर के निदेशक प्रो. संजय पंत ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि खेल जीवन में सकारात्मकता लाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। वहीं, डीएसए के महासचिव मनोज जोशी ने कहा कि ‘खेलेगा इंडिया, तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया’। उन्होंने कहा कि डीएसए प्रत्येक खिलाड़ी और खेल के विकास के लिए समर्पित है।
छह महाविद्यालयों की टीमों ने लिया हिस्सा
प्रतियोगिता के आयोजक सचिव, कुमाऊं विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स ऑफिसर एवं शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने प्रतियोगिता की रूपरेखा प्रस्तुत की और सभी का स्वागत किया। प्रतियोगिता नॉकआउट आधार पर आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न महाविद्यालयों की महिला बास्केटबॉल टीमों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिता में एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी और पीएनजी कॉलेज रामनगर के अलावा इंदिरा प्रियदर्शिनी राजकीय स्नातकोत्तर वाणिज्य महाविद्यालय हल्द्वानी, राधे हरि पीजी कॉलेज काशीपुर, डीएसबी परिसर नैनीताल तथा एसबीएस पीजी कॉलेज रुद्रपुर की टीमों ने प्रतिभाग किया।
खिलाड़ियों को मेडल और ट्रॉफी देकर किया सम्मानित
प्रतियोगिता के समापन पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीन ऑफ एजुकेशन प्रो. ललित तिवारी, स्पोर्ट्स एम्बेसडर डॉ. नागेंद्र शर्मा, डॉ. पुष्कर बिष्ट और डॉ. संतोष कुमार ने विजेता एवं उपविजेता टीमों के खिलाड़ियों को मेडल और ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. ललित तिवारी ने किया। उन्होंने बास्केटबॉल के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस खेल की शुरुआत वर्ष 1891 में हुई थी। पुरुष बास्केटबॉल को वर्ष 1936 के बर्लिन ओलंपिक में शामिल किया गया, जबकि महिला बास्केटबॉल की शुरुआत वर्ष 1976 के मॉन्ट्रियल ओलंपिक से हुई।
इस अवसर पर अनीता रावत, अपूर्व बिष्ट, चारु, लाल सिंह, डॉ. नीमा, लोकेश पांडेय, डॉ. राहुल, जीवन भट्ट, डॉ. सुरेंद्र, डॉ. हेमा सिंह और डॉ. रुचि साह सहित कई खेलप्रेमी एवं शिक्षाविद मौजूद रहे। स्पोर्ट्स एम्बेसडर एवं पूर्व स्पोर्ट्स ऑफिसर डॉ. नागेंद्र शर्मा, जसपुर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. पुष्कर बिष्ट तथा डीएसए के पूर्व संयुक्त सचिव भुवन बिष्ट भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
प्रतियोगिता के सफल आयोजन में टेक्निकल टेबल पर हरीश जोशी, हरीश चौधरी, विनोद, फरीद, ज्ञान, दीपक और फरदीन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आयोजन के माध्यम से महिला खिलाड़ियों को अपनी खेल प्रतिभा दिखाने और अंतर महाविद्यालय स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिला।

