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ओखलकांडा के डालकन्या इंटर कॉलेज में शिक्षकों की मारपीट का मामला गरमाया, जांच के बीच शिक्षक की पत्नी और भाई के पहुंचने पर उठे सवाल

डालकन्या इंटर कॉलेज में शिक्षकों के विवाद की जांच के बीच हंगामा, ग्रामीणों ने लगाया जांच प्रभावित करने का आरोप

शिक्षकों की आपसी मारपीट से सवालों के घेरे में शिक्षा व्यवस्था, आरोपी शिक्षकों के तबादले की उठी मांग

शिक्षकों के विवाद के बाद अब जांच पर सवाल, ग्रामीण बोले—बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित

जांच टीम के सामने शिक्षक के भाई व पत्नी की मौजूदगी पर विवाद, ग्रामीणों ने डराने-धमकाने के लगाए आरोप

भीमताल/ओखलकांडा। नैनीताल जिले के ओखलकांडा विकासखंड स्थित राजकीय इंटर कॉलेज डालकन्या में शिक्षकों के बीच कथित मारपीट का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।

विद्यालय में हुए विवाद की जांच के लिए पहुंची टीम के दौरान शिक्षक मुरली भट्ट की पत्नी और बड़े भाई के विद्यालय पहुंचने से मामला और गरमा गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि परिजनों की मौजूदगी से जांच प्रक्रिया प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

ग्रामीणों के अनुसार, जिस विद्यालय में बच्चों को शिक्षा देकर उनका भविष्य संवारने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर होती है, उसी विद्यालय में शिक्षकों के बीच आपसी विवाद और मारपीट की घटना सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से न केवल विद्यालय का माहौल खराब होता है, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और उनके मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

ग्रामीणों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि शिक्षकों के बीच हुए विवाद की जांच के लिए टीम विद्यालय पहुंची थी।

इसी दौरान संबंधित शिक्षक की पत्नी और बड़े भाई वहां पहुंचे व जांच को प्रभावित किया। उक्त शिक्षक के परिवार पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को डराने-धमकाने का भी आरोप है।

शिक्षक के परिवार पर कार्यालय में तालाबंदी व विभाग के खिलाफ नारेबाजी का आरोप 

ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक के बड़े भाई ने जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया और बच्चों को डराने-धमकाने की कोशिश की।

शिक्षक पर  आरोप है कि उन्होंनेेेेेेे पत्नी को क्षेत्र पंचायत का  चुनाव लड़ने की जानकारी विभाग को नहीं दी। जो कि विभागीय नियमों की  अवहेलना है।

शिक्षक पर  गांव में राजनीतिक फायदे के लिए कोचिंग सेंटर चलाने का आरोप है। जो कि विभागीय नियमों की  अवहेलना है।

आरोपी शिक्षक का गांव के ही स्कूल में शिक्षक होना  व पत्नी को चुनाव लड़ना भाई का पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य होना गांव के लोगोंं व बच्चों पर दबाव बनाकर गांव में नौकरी कर लोगों में  दहशत कायम करना। उक्त शिक्षक के परिवार पर ग्रामीणों ने गंभीर आरोपलगाए हैं।

ग्रामीणों द्वारा इस घटनाक्रम का वीडियो साझा किए जाने की बात भी सामने आई है। वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उसमें दिखाई देने वाली गतिविधियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि संबंधित शिक्षक का परिवार गांव में ही रहता है और उसके बड़े भाई के पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य होने तथा राजनीतिक पहुंच का हवाला देकर ग्रामीणों पर दबाव बनाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित पक्ष और प्रशासन के आधिकारिक बयान के बाद ही हो सकेगी।

 

डालकन्या इंटर कॉलेज में सामने आए ताजा विवाद ने एक बार फिर विद्यालयों में शिक्षकों के आचरण, अनुशासन और शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में शैक्षणिक माहौल सामान्य बनाए रखने के लिए विभाग को मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

ग्रामीणों के अनुसार, विद्यालय में चल रहे विवाद के चलते पठन-पाठन का माहौल प्रभावित हो रहा है। अभिभावकों और ग्रामीणों को आशंका है कि इस तरह के विवादों का असर बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ सकता है।

ग्रामीणों कहना है कि विद्यार्थियों को भयमुक्त वातावरण में शिक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जांच में दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, विद्यालय में शैक्षणिक माहौल सामान्य बनाए रखने के लिए संबंधित शिक्षकों को ओखलकांडा विकासखंड से बाहर स्थानांतरित करने पर भी विचार किया जाए।

शिक्षा विभाग की भूमिका पर निगाहें

अब इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की भूमिका अहम हो गई है। ग्रामीणों की मांग है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि सभी पक्षों के बयान दर्ज कर तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए। साथ ही, जांच के दौरान बच्चों और ग्रामीणों पर किसी तरह का दबाव न पड़े, यह भी सुनिश्चित किया जाए।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिक्षा विभाग इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा, या फिर विद्यालय में चल रहा विवाद विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित करता रहेगा? फिलहाल, ग्रामीणों को विभाग की कार्रवाई और विद्यालय में शैक्षणिक माहौल सामान्य होने का इंतजार है।

ओखलकांडा की बीईओ सुलोहिता नेगी ने बताया कि जांच प्रशासन को सौंप गई है।  शिक्षा के मंदिर में इस तरह की घटनाएं सही नहीं है।

 जानकारी में आया है कि ओखलकांडा की बीईओ सुलोहिता नेगी को पूर्व में जान से मारने की धमकी दी गई थी। इस घटना के बाद वह भी काफी भयभीत हैं। उन्हें अपनी जान माल का भय सता रहा है।

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