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ओखलकांडा ब्लाक के राजकीय इंटर कॉलेज डालकन्या में विवाद गहराया, प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों की पिटाई का वीडियो वायरल; जांच प्रक्रिया से ग्रामीण असंतुष्ट, घर के नजदीकी विद्यालय में संबद्धता पर उठाए सवाल

भीमताल/ओखलकांडा। नैनीताल जिले के ओखलकांडा विकासखंड स्थित राजकीय इंटर कॉलेज डालकन्या में शिक्षकों के बीच हुई मारपीट का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब विद्यार्थियों की पिटाई से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद और गहरा गया है।

वायरल वीडियो में प्रार्थना सभा के दौरान विद्यार्थियों की पिटाई किए जाने का दावा किया जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद अभिभावकों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

मामले को लेकर ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में शिक्षा का माहौल बनाए रखने के बजाय शिक्षकों के बीच विवाद और मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिसका सीधा असर छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने और अपना भविष्य संवारने के लिए जाते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाओं से उनके मन में भय पैदा हो सकता है। उन्होंने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से विद्यालय के शैक्षिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए खंड शिक्षा अधिकारी ओखलकांडा सुलोहिता नेगी ने आदेश जारी कर हिंदी प्रवक्ता मुरली मनोहर भट्ट को सुरक्षा के दृष्टिगत अग्रिम आदेशों तक पीएम श्री राजकीय इंटर कॉलेज पतलोट में कार्ययोजित करने के निर्देश दिए। वहीं, प्रकरण की जांच के लिए उप शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक शिक्षा), ओखलकांडा प्रवीण दिगारी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। आदेश में जांच कर निर्धारित समयसीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए थे।

विद्यार्थियों की पिटाई का वीडियो वायरल होने से बढ़ी नाराजगी

शिक्षकों के बीच विवाद के बीच अब विद्यार्थियों के साथ कथित मारपीट का वीडियो सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि एक शिक्षक द्वारा बच्चों के साथ मारपीट करने, उन्हें धक्के देकर कक्षा से बाहर निकालने और डंडे से पीटने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। हालांकि, वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की वास्तविकता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यार्थियों से किसी प्रकार की शिकायत थी, तो शिक्षक को अभिभावक संघ की बैठक बुलाकर संबंधित विषयों पर चर्चा करनी चाहिए थी। बच्चों के साथ सार्वजनिक रूप से मारपीट करना गुरु-शिष्य की परंपरा और शिक्षक की जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि विद्यालय में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर विद्यार्थियों के साथ कथित हिंसा को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

हालांकि, राजनीतिक संबंधों और स्थानांतरण के पीछे कथित प्रभाव को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की जांच पूरी होने तक संबंधित शिक्षक को ओखलकांडा विकासखंड से बाहर स्थानांतरित किया जाए, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से हो सके और विद्यालय का माहौल सामान्य बनाया जा सके।

जिलाशिक्षाधिकारी और शिक्षा मंत्री से कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी नैनीताल, जिला शिक्षा अधिकारी और शिक्षा मंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही, जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा विभाग और प्रशासन की ओर से उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करने और शिक्षा मंत्री का घेराव करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना विभाग की जिम्मेदारी है।

जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

मुख्य शिक्षा अधिकारी रणजीत सिंह नेगी के अनुसार, धारी के उपजिलाधिकारी अनुराग आर्या की ओर से जांच कमेटी गठित की गई है। टीम ने शनिवार को विद्यालय पहुंचकर संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए। विद्यार्थियों की पिटाई से संबंधित वायरल वीडियो की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, राजकीय इंटर कॉलेज डालकन्या में शिक्षकों के बीच हुए विवाद और विद्यार्थियों के साथ कथित मारपीट के मामले ने शिक्षा विभाग के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम में किसकी भूमिका रही और संबंधित लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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