उत्तराखण्ड कुमाऊं ख़बरें नैनीताल

रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू ने गिरफ्तारी से बचने के लिए खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, फिलहाल नहीं मिली राहत

नैनीताल रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू को नहीं मिली हाई कोर्ट से राहत 

गिरफ्तारी पर रोक और मुकदमा निरस्त करने की मांग वाली याचिका दूसरी पीठ को संदर्भित, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई सुनवाई

 रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला 

नैनीताल। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी से राहत पाने के लिए गिरधारी लाल साहू ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की है। हालांकि, फिलहाल उन्हें हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई, जिसके बाद इसे सुनवाई के लिए दूसरी पीठ को संदर्भित कर दिया गया।

याचिकाकर्ता गिरधारी लाल साहू की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे में लगाए गए सभी आरोप झूठे और निराधार हैं। उनका कहना है कि उन्हें गलत तरीके से फंसाकर उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया है। याचिका में उन्होंने अपने वैवाहिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी शादी वर्ष 2004 में हुई थी और तब से वे साथ रह रहे हैं।

मुकदमे में उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने स्वयं को अविवाहित बताकर शादी की, जबकि शादी के समय वह पहले से विवाहित थे। इसके अलावा, उन पर कथित तौर पर जालसाजी कर फर्जी हस्ताक्षर बनाने और इसके जरिए उन्हें कई कंपनियों के निदेशक पदों से हटाने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायत में जान से मारने की धमकी देने और जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप भी शामिल बताए गए हैं।

वहीं, गिरधारी लाल साहू की ओर से अपनी याचिका में यह भी दावा किया गया है कि मंत्री बनने के बाद रेखा आर्या के पास कथित तौर पर 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित किए जाने का मामला सामने आया था। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। ये सभी याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में रखे गए दावे हैं, जिनकी सत्यता का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना है।

गिरधारी लाल साहू ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त किया जाए और मामले में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। फिलहाल अदालत से उन्हें कोई अंतरिम राहत मिलने की जानकारी नहीं है। एकलपीठ द्वारा मामले को दूसरी पीठ के समक्ष भेजे जाने के बाद अब आगे की सुनवाई और अदालत के रुख पर नजर रहेगी।

फिलहाल इस मामले में कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। याचिका में लगाए गए आरोप और बचाव में पेश किए गए तर्क अदालत के समक्ष विचाराधीन हैं। आगे की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि गिरधारी लाल साहू को गिरफ्तारी से राहत मिलती है या नहीं और मुकदमा निरस्त करने की उनकी मांग पर अदालत क्या निर्णय लेती है।

Advertisement