एमबीपीजी छात्रसंघ चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला, बागी आर्यन बेलवाल ने बढ़ाई ABVP-NSUI की चुनौती
29 सितंबर को होगा मतदान, अध्यक्ष पद पर धीरज बिष्ट, मेहुल शाह और आर्यन बेलवाल आमने-सामने; पूर्व छात्र नेताओं और ABVP के बागी कार्यकर्ताओं के समर्थन से बदले चुनावी समीकरण
हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े मोतीराम बाबूराम राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (एमबीपीजी कॉलेज) में छात्रसंघ चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। आगामी 29 सितंबर को होने वाले छात्रसंघ चुनाव को लेकर कॉलेज परिसर में प्रचार अभियान जोर पकड़ चुका है। अध्यक्ष पद पर इस बार मुकाबला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और निर्दलीय प्रत्याशी के बीच त्रिकोणीय नजर आ रहा है।
चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे प्रत्याशियों और छात्र संगठनों ने अपनी पूरी ताकत प्रचार में झोंक दी है। कैंपस में छात्र-छात्राओं से संपर्क, बैठकें और समर्थन जुटाने का सिलसिला लगातार जारी है।
ABVP से टिकट कटने के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे आर्यन बेलवाल
इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा आर्यन बेलवाल को लेकर हो रही है। ABVP से टिकट नहीं मिलने के बाद आर्यन बेलवाल ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। संगठन के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतरने के बाद से ही वह चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण चेहरा बन गए हैं।
आर्यन बेलवाल को अब अपने पूर्व संगठन के कुछ पूर्व पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का समर्थन मिलने की बात सामने आ रही है। टिकट वितरण को लेकर असंतोष जताने वाले कुछ पूर्व पदाधिकारी और कार्यकर्ता उनके समर्थन में प्रचार करते नजर आ रहे हैं। इससे अध्यक्ष पद का मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।
पूर्व NSUI प्रत्याशी कमल बोरा का समर्थन चर्चा में
आर्यन बेलवाल को उस समय एक और महत्वपूर्ण समर्थन मिला, जब पिछले वर्ष NSUI के टिकट पर अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके पूर्व छात्र नेता कमल बोरा ने उनके समर्थन का ऐलान किया। कमल बोरा के आर्यन बेलवाल के पक्ष में आने से छात्र राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
इस घटनाक्रम को लेकर कैंपस में अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों की चर्चा हो रही है। हालांकि, इन समर्थन और गठजोड़ों का चुनाव परिणाम पर क्या असर पड़ेगा, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
ABVP के सामने संगठन के अधिकृत प्रत्याशी को जिताने की चुनौती
ABVP ने अध्यक्ष पद के लिए धीरज बिष्ट को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। संगठन समर्थक छात्र उनके पक्ष में प्रचार में जुटे हुए हैं। दूसरी ओर, टिकट वितरण के बाद सामने आए असंतोष और कुछ पूर्व पदाधिकारियों के आर्यन बेलवाल के समर्थन में आने से संगठन के सामने अपने अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में समर्थन मजबूत करने की चुनौती भी है।
ABVP के सामने अब चुनावी मैदान में अपने संगठन के अधिकृत प्रत्याशी को मजबूती से स्थापित करने के साथ-साथ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे पूर्व कार्यकर्ता के प्रभाव को भी संभालने की स्थिति बन गई है।
NSUI से मेहुल शाह मैदान में
अध्यक्ष पद पर NSUI ने मेहुल शाह को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है। NSUI समर्थक भी लगातार छात्र-छात्राओं के बीच पहुंचकर समर्थन जुटाने में लगे हैं। ऐसे में अध्यक्ष पद का मुकाबला केवल दो छात्र संगठनों के अधिकृत प्रत्याशियों के बीच सीमित नहीं रह गया है।
निर्दलीय आर्यन बेलवाल को मिल रहे समर्थन के चलते इस बार चुनाव में तीन अलग-अलग खेमों के बीच मुकाबले की तस्वीर बन रही है।
अध्यक्ष पद पर तीन प्रमुख चेहरे
एमबीपीजी कॉलेज अध्यक्ष पद के चुनावी मैदान में फिलहाल प्रमुख रूप से तीन नाम चर्चा में हैं—
धीरज बिष्ट — ABVP के अधिकृत प्रत्याशी
मेहुल शाह — NSUI के अधिकृत प्रत्याशी
आर्यन बेलवाल — निर्दलीय प्रत्याशी एवं ABVP के पूर्व कार्यकर्ता
तीनों प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर छात्र-छात्राओं से संपर्क कर समर्थन जुटाने में लगे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान व्यक्तिगत संपर्क के साथ-साथ छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी जा रही है।
29 सितंबर को होगा फैसला
एमबीपीजी कॉलेज में अध्यक्ष पद का चुनाव इस बार कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर ABVP और NSUI अपने अधिकृत प्रत्याशियों के साथ मैदान में हैं, तो दूसरी ओर निर्दलीय प्रत्याशी आर्यन बेलवाल के समर्थन में अलग-अलग छात्र नेताओं और पूर्व कार्यकर्ताओं के आने से मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।
अब सभी की नजरें 29 सितंबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। अंतिम फैसला एमबीपीजी कॉलेज के छात्र-छात्राओं के मतदान से होगा और उसी दिन स्पष्ट होगा कि अध्यक्ष पद की कमान किस प्रत्याशी के हाथ आती है।
एमबीपीजी छात्रसंघ चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला, बागी आर्यन बेलवाल ने बढ़ाई ABVP-NSUI की चुनौती

