लगातार बारिश से पहाड़ों में बढ़ा खतरा, कई जिलों का संपर्क प्रभावित; राहत एवं बहाली कार्य युद्धस्तर पर जारी
उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के विभिन्न पर्वतीय जिलों में भूस्खलन, मलबा आने और सड़कें धंसने की घटनाओं के चलते यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। राज्यभर में कई प्रमुख मार्ग बाधित हो गए हैं, जबकि यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर फंसे करीब 100 तीर्थयात्रियों को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन ने सफल रेस्क्यू अभियान चलाकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
यमुनोत्री हाईवे का 100 मीटर हिस्सा बहा
एसडीआरएफ के अनुसार, उत्तरकाशी जिले के स्याना चट्टी क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण भारी भूस्खलन हुआ, जिससे यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का लगभग 100 मीटर हिस्सा बह गया। मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध होने से करीब दो दिनों तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु और यात्री रास्ते में फंस गए।
रस्सियों के सहारे सुरक्षित निकाले गए यात्री
रेस्क्यू अभियान के दौरान राहत एवं बचाव दलों ने कठिन परिस्थितियों में वैकल्पिक रास्ता तैयार किया। इसके बाद रस्सियों की मदद से यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। एसडीआरएफ और प्रशासन की संयुक्त टीमों ने लगातार अभियान चलाकर सभी फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया।
185 सड़कें अब भी बंद
राज्य आपदा एवं सड़क प्रबंधन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को 277 नई सड़कें बंद हुईं। पहले से बंद 188 मार्गों को मिलाकर कुल 465 सड़कें प्रभावित रहीं। इनमें से 280 मार्ग खोल दिए गए हैं, जबकि 185 सड़कें अभी भी बंद हैं।
बंद मार्गों में—
1 राष्ट्रीय राजमार्ग
5 राज्य राजमार्ग
2 मुख्य जिला मार्ग
43 अन्य जिला मार्ग
127 ग्रामीण सड़कें (पीएमजीएसवाई)
शामिल हैं।
इन जिलों में सबसे अधिक असर
बारिश और भूस्खलन से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में पौड़ी शामिल है, जहां 47 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा चमोली में 35, पिथौरागढ़ में 19, देहरादून में 15, टिहरी और उत्तरकाशी में 12-12, नैनीताल में 12 तथा रुद्रप्रयाग में 10 सड़कें बंद हैं। उधमसिंह नगर में फिलहाल कोई सड़क बंद नहीं है।
युद्धस्तर पर बहाली कार्य जारी
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और पीएमजीएसवाई की टीमें प्रभावित मार्गों को जल्द से जल्द खोलने के लिए युद्धस्तर पर राहत एवं बहाली कार्य में जुटी हुई हैं। संवेदनशील इलाकों में जेसीबी मशीनें और अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
प्रशासन ने लोगों और चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने तथा खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
अधिकारियों का कहना है कि मानसून के दौरान भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं की आशंका बनी रहती है, इसलिए संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
