ख़बरें राष्ट्रीय

25वें दिन भी जारी सोनम वांगचुक का अनशन, बोले— छात्रों पर कार्रवाई नहीं होगी तो आज ही तोड़ दूंगा भूख हड़ताल

ख़बर शेयर करें

11 किलो वजन घटने का दावा, पत्नी ने अस्पताल के बाहर पुलिस तैनाती और सांसदों से मुलाकात न कराने पर उठाए सवाल

नई दिल्ली/गुरुग्राम। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का भूख हड़ताल शुक्रवार को 25वें दिन भी जारी रहा। गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल से जारी वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि उनकी सरकार से केवल एक ही मांग है— प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह का बल प्रयोग, एफआईआर या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार यह भरोसा देती है तो वह आज ही अपना अनशन समाप्त करने के लिए तैयार हैं।

वीडियो संदेश में वांगचुक ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी देते हुए कहा, “मैं अभी भी जिंदा हूं। 25 दिन के अनशन में मेरा लगभग 11 किलो वजन कम हो चुका है। शरीर की मांसपेशियां भी घटने लगी हैं, लेकिन मैं ठीक हूं।”

छात्रों की शांतिपूर्ण भूमिका की सराहना

सोनम वांगचुक ने कहा कि छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई और कथित बल प्रयोग की खबरों के बाद उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का निर्णय लिया। उन्होंने प्रदर्शन कर रहे छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि उकसावे और कथित पत्थरबाजी की कोशिशों के बावजूद छात्रों ने संयम बनाए रखा और किसी भी प्रकार की हिंसा का जवाब हिंसा से नहीं दिया।

उन्होंने कहा, “मैं उन सभी छात्रों को सलाम करता हूं जिन्होंने लाठियां खाने के बावजूद धैर्य रखा और शांति बनाए रखी।”

65 सांसदों ने की अनशन समाप्त करने की अपील

वांगचुक ने बताया कि कई सांसद और सत्तारूढ़ दल के नेता उनसे मिलने आए और लगभग 65 सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र देकर उनसे अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वे भी अपना सामाजिक कार्य फिर से शुरू करना चाहते हैं, लेकिन उससे पहले सरकार को स्पष्ट आश्वासन देना होगा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई बल प्रयोग नहीं होगा, किसी निर्दोष छात्र पर गलत तरीके से एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी और पुलिस या प्रशासन उन्हें प्रताड़ित नहीं करेगा।

उन्होंने कहा, “अगर सरकार जल्द यह भरोसा देती है तो मैं आज ही अपना अनशन खत्म कर दूंगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मजबूरी में मुझे इसे जारी रखना पड़ेगा।”

पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप

सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने भी सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद वांगचुक को बेहतर इलाज के लिए गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन अस्पताल के बाहर अब भी भारी पुलिस बल तैनात है।

डॉ. आंगमो का कहना है कि अदालत ने स्पष्ट किया था कि वांगचुक किसी हिरासत में नहीं हैं और उन्हें स्वतंत्र वातावरण मिलना चाहिए। इसके बावजूद अस्पताल के बाहर पुलिस की मौजूदगी उन पर मानसिक दबाव बना रही है।

सांसदों से मुलाकात पर भी सवाल

डॉ. आंगमो ने दावा किया कि कई सांसद वांगचुक से मिलकर उन्हें अनशन समाप्त करने का अनुरोध करना चाहते थे, लेकिन उन्हें मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार वास्तव में चाहती है कि वांगचुक अपना अनशन समाप्त करें तो सांसदों को उनसे मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही।

उन्होंने दोहराया कि सोनम वांगचुक तभी अपना अनशन समाप्त करेंगे जब सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट और सार्वजनिक आश्वासन देगी।