स्थाई राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन का पांचवा दिन ऋषिकेश के राज्य आंदोलनकारी रामेश्वर शर्मा अनशन में बैठे
ऋषिकेश से हल्द्वानी पहुंचे 65 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी रामेश्वर शर्मा, पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी ने भी उठाई पहाड़ के अस्तित्व, अस्मिता और अधिकारों की आवाज
हल्द्वानी। उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाए जाने की मांग को लेकर हल्द्वानी के बुद्ध पार्क, तिकोनिया में चल रहा अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन पांचवें दिन भी जारी रहा। 18 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए इस आंदोलन को विभिन्न जिलों से पहुंच रहे राज्य आंदोलनकारियों और समर्थकों का लगातार समर्थन मिल रहा है। गुरुवार को ऋषिकेश से हल्द्वानी पहुंचे 65 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी रामेश्वर शर्मा अनशन पर बैठे। इस दौरान आंदोलनकारियों ने गैरसैंण को प्रदेश की स्थायी राजधानी घोषित करने और राज्य आंदोलनकारियों के सपनों को पूरा करने की मांग उठाई।
राज्य आंदोलन की यादें साझा करते हुए भावुक हुए रामेश्वर शर्मा
ऋषिकेश से हल्द्वानी पहुंचे रामेश्वर शर्मा ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान किए गए संघर्ष को याद करते हुए कहा कि अलग राज्य की मांग के लिए आंदोलनकारियों ने लाठियां खाईं और गोलियां झेलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान महिलाओं के सम्मान को भी ठेस पहुंची और अनेक लोगों ने बड़ी कुर्बानियां दीं।
रामेश्वर शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने छह युवाओं को गोली लगते देखा था। उस समय सपना था कि उत्तराखंड राज्य बनेगा, लोगों को उनके अधिकार मिलेंगे और पहाड़ों से पलायन रुकेगा। लेकिन आज राज्य की स्थिति देखकर उन्हें दुख होता है। उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदों और सपनों को लेकर अलग राज्य की लड़ाई लड़ी गई थी, वे आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो पाए हैं।
राज्य आंदोलन की यादें साझा करते हुए भावुक हुए रामेश्वर शर्मा
ऋषिकेश से हल्द्वानी पहुंचे रामेश्वर शर्मा ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान किए गए संघर्ष को याद करते हुए कहा कि अलग राज्य की मांग के लिए आंदोलनकारियों ने लाठियां खाईं और गोलियां झेलीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान महिलाओं के सम्मान को भी ठेस पहुंची और अनेक लोगों ने बड़ी कुर्बानियां दीं।
रामेश्वर शर्मा ने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने छह युवाओं को गोली लगते देखा था। उस समय सपना था कि उत्तराखंड राज्य बनेगा, लोगों को उनके अधिकार मिलेंगे और पहाड़ों से पलायन रुकेगा। लेकिन आज राज्य की स्थिति देखकर उन्हें दुख होता है। उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदों और सपनों को लेकर अलग राज्य की लड़ाई लड़ी गई थी, वे आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो पाए हैं।
उन्होंने गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं और पहाड़ के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल बताया।
पहाड़ी आर्मी के संस्थापक बोले—विभिन्न जिलों से मिल रहा समर्थन
आंदोलन से जुड़े पहाड़ी आर्मी के संस्थापक हरीश रावत ने बताया कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर चल रहे क्रमिक अनशन में अब तक टिहरी के अनिल बहुगुणा, चखुटिया के भुवन कठायत, गोचर के रमेश थपलियाल, रुद्रप्रयाग के सेवानिवृत्त इंजीनियर दयाल सिंह राणा और मासी के आनंद राम सहित विभिन्न क्षेत्रों के आंदोलनकारी शामिल हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जिलों से लोग लगातार बुद्ध पार्क पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दे रहे हैं। दूसरे राज्यों में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडी भी इस अभियान से जुड़ने और आंदोलन में भागीदारी करने के लिए हल्द्वानी पहुंच रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थायी राजधानी का मुद्दा केवल किसी एक क्षेत्र का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के भविष्य और पहाड़ी क्षेत्रों के विकास से जुड़ा विषय है।
पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी ने उठाया पहाड़ के भविष्य का सवाल
अनशन में शामिल पूर्व आईएएस विनोद प्रसाद रतूड़ी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य का निर्माण पहाड़ के अस्तित्व, अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से हुआ था। राज्य गठन के वर्षों बाद भी स्थायी राजधानी का सवाल लंबित रहना चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि पहाड़ के खेतों, किसानों, गांवों और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाना आवश्यक है। राज्य आंदोलनकारियों और शहीदों ने जिस उत्तराखंड की कल्पना की थी, उसे साकार करने के लिए अब ठोस निर्णय लेने की जरूरत है।
रतूड़ी ने कहा कि आंदोलन को व्यापक बनाने के लिए हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। पहाड़ की पहचान, पलायन, रोजगार और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास जैसे मुद्दों पर सभी को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।
78 वर्षीय आंदोलनकारी गोपाल दत्त कुमोड़ी भी आंदोलन में डटे
गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर नंदप्रयाग से हल्द्वानी पहुंचे 78 वर्षीय राज्य आंदोलनकारी गोपाल दत्त कुमोड़ी भी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। वह बुद्ध पार्क में लगाए गए टेंट में 24 घंटे रहकर आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं।
गोपाल दत्त कुमोड़ी ने कहा कि गैरसैंण में विधानसभा भवन मौजूद है और उसे ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा भी दिया जा चुका है, लेकिन स्थायी राजधानी का प्रश्न अब तक लंबित है। उन्होंने मांग की कि सरकार आगामी गैरसैंण विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर स्पष्ट और ठोस निर्णय ले, ताकि लंबे समय से चली आ रही मांग पर स्थिति साफ हो सके।
स्थायी राजधानी के मुद्दे पर निर्णायक फैसले की मांग
बुद्ध पार्क में जारी क्रमिक अनशन के माध्यम से आंदोलनकारी सरकार से गैरसैंण को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी घोषित करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि राजधानी का सवाल पहाड़ों में विकास, रोजगार के अवसरों, गांवों को बचाने और पलायन रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
आंदोलनकारियों ने अपील की कि राज्य के सभी क्षेत्रों के लोग इस मुद्दे पर एकजुट हों, ताकि राज्य आंदोलन के दौरान देखे गए सपनों और अपेक्षाओं को पूरा करने की दिशा में सरकार ठोस कदम उठाए।
बड़ी संख्या में आंदोलनकारी रहे मौजूद
इस दौरान पहाड़ी आर्मी के जिलाध्यक्ष फौजी राजेंद्र कांडपाल, जीवन चंद्र उप्रेती, डॉ. आशुतोष पंत, फौजी भुवन पांडेय, प्रेमा मेर, नीमा भट्ट, अंजू पांडे, ललित मोहन सिंह जीना, सुनील सिंह, विजय जोशी, संजय बिष्ट, हम शर्मा, कविंद्र चंद, हिमांशु शर्मा, अजय सिंह, संतोष कांडपाल, देवेंद्र सालाकोट, संजय वर्मा, हर्षित बिष्ट, मनोज सिंह, राहुल सिंह, धर्मावाला, करण सिंह बिष्ट, संजय रौतेला, कमल रावत सहित दर्जनों आंदोलनकारी मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को लेकर उनका संघर्ष जारी रहेगा और वे इस मुद्दे पर सरकार से ठोस निर्णय की अपेक्षा करते हैं।

