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नैनीताल : जंगलियागांव में बारिश ने मचाई तबाही, आलू की फसल चौपट; सैकड़ों नाली कृषि भूमि बही

नैनीताल। लगातार हो रही भारी बारिश के चलते नैनीताल जिले के ग्राम पंचायत जंगलियागांव में भी व्यापक नुकसान हुआ है।

अतिवृष्टि के कारण जहां किसानों की खेतों में खड़ी आलू की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है, वहीं कई स्थानों पर कृषि योग्य भूमि बहने के साथ ही संपर्क मार्गों और सरकारी संपत्तियों को भी भारी क्षति पहुंची है।

बारिश और भूस्खलन के कारण ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

ग्राम प्रधान राधा कुल्याल ने बताया कि ग्राम पंचायत के विभिन्न तोकों में भारी बारिश से काफी नुकसान हुआ है। अनु बाहुल्य तोक शिमला में पिटौला नाले के तेज बहाव के कारण कृषि भूमि दब गई है। इसके साथ ही लघु सिंचाई विभाग द्वारा निर्मित सिंचाई गुल भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने से किसानों के सामने आगे की फसल को लेकर भी संकट खड़ा हो गया है।

उन्होंने बताया कि राजकीय इंटर कॉलेज का मैदान भी बारिश की वजह से ध्वस्त हो गया है। वहीं सेला तोक में भूस्खलन होने से खतरा बढ़ गया है। ग्राम पंचायत के विभिन्न हिस्सों में संपर्क मार्ग जगह-जगह टूट गए हैं, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। कई काश्तकारों की कृषि भूमि भी नाले और बरसाती पानी के तेज बहाव में बह गई है।

ग्रामीणों के अनुसार, बारिश से खेतों में तैयार हो रही आलू की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कई किसानों की महीनों की मेहनत देखते ही देखते बर्बाद हो गई। कृषि भूमि के बहने से किसानों को फसल के नुकसान के साथ-साथ भविष्य में खेती के लिए भूमि कम होने का भी खतरा पैदा हो गया है।

ग्राम प्रधान राधा कुल्याल ने जंगलियागांव में हुए नुकसान की जानकारी कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश सिंह बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य बिपिन सिंह जंतवाल, जिलाधिकारी नैनीताल सहित संबंधित अधिकारियों को दी है। उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर नुकसान का आकलन कराने तथा प्रभावित किसानों और ग्रामीणों को उचित राहत एवं मुआवजा दिलाने की मांग की है।

ग्राम प्रधान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश से हुए नुकसान को देखते हुए प्रशासन को तत्काल प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों, सिंचाई गुल, सरकारी संपत्तियों और कृषि भूमि की मरम्मत के लिए आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।

साथ ही जिन किसानों की फसल और कृषि भूमि को नुकसान हुआ है, उन्हें नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।