नैनीताल नैनीझील से सिंचाई विभाग के द्वारा हजारों कुंटल मलवा निकला गया
भूवैज्ञानिकों और सिंचाई विभाग को जांच के निर्देश, झील किनारों से मिट्टी हटाने का काम शुरू; पानी भरने से मलबा निकालना बनी चुनौती
रिपोर्टर गुड्डू सिंह ठठोला
नैनीताल। लगातार हो रही बारिश के बीच नैनीझील में बड़ी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और गाद पहुंचने से झील के अस्तित्व और गहराई को लेकर चिंता बढ़ गई है। झील में लगातार जमा हो रहे सिल्ट और मलबे के मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए अब इसकी जांच शुरू कर दी है।
जिलाधिकारी नैनीताल ने संबंधित विभागों को झील में मलबा पहुंचने के कारणों का पता लगाने और इसकी रोकथाम के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की ओर से भूवैज्ञानिकों और सिंचाई विभाग को झील में लगातार पहुंच रही मिट्टी और गाद के स्रोतों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। टीम यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि आखिर किन क्षेत्रों से बारिश के पानी के साथ मिट्टी और पत्थर नैनीझील तक पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही नालों और जल निकासी वाले क्षेत्रों की भी जांच की जा रही है।
प्रशासन इस पहलू की भी जांच कर रहा है कि कहीं किसी निर्माण कार्य से निकलने वाला मलबा नालों में तो नहीं डाला जा रहा है। यदि निर्माण स्थलों से निकलने वाला मलबा सीधे नालों में पहुंच रहा है तो बारिश के दौरान यही मलबा बहकर झील में पहुंच सकता है। सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़े मामलों की भी जांच कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
झील के किनारों से मिट्टी हटाने का काम शुरू
नैनीझील के किनारों पर जमा मिट्टी और गाद को हटाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। हालांकि वर्तमान समय में झील में पर्याप्त मात्रा में पानी भरा होने के कारण सिल्ट और मलबे को बाहर निकालना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से मलबा हटाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि झील के जलस्तर और पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
हर बारिश में बढ़ती है सिल्ट की समस्या
नैनीझील में बारिश के दौरान मिट्टी, पत्थर और गाद पहुंचना कोई नई समस्या नहीं है। पिछले कई वर्षों से बरसात के दौरान विभिन्न नालों और जलधाराओं के माध्यम से सिल्ट झील में पहुंचती रही है। लगातार गाद जमा होने के कारण झील की तलहटी में सिल्ट की परत बढ़ने और उसकी प्राकृतिक गहराई कम होने की आशंका जताई जाती रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि झील में इसी तरह लगातार मिट्टी और मलबा पहुंचता रहा तो भविष्य में इसका असर झील की जलधारण क्षमता पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि प्रशासन अब केवल झील से मलबा हटाने के बजाय मलबा झील तक पहुंचने के स्रोतों को चिन्हित कर स्थायी समाधान तलाशने की दिशा में काम कर रहा है।
स्रोत पर रोक लगाना जरूरी
नैनीझील में सिल्ट जमा होने की समस्या का स्थायी समाधान केवल झील से गाद निकालने तक सीमित नहीं है। इसके लिए उन नालों, जलधाराओं, निर्माण स्थलों और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों को चिन्हित करना जरूरी है, जहां से बारिश के दौरान मिट्टी और मलबा बहकर झील में पहुंचता है।
प्रशासन की जांच में यदि किसी निर्माण स्थल या कार्यदायी संस्था की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल प्रशासन की नजर झील में पहुंच रहे मलबे के स्रोतों पर है।
नैनीझील नैनीताल की पहचान और पर्यटन का प्रमुख आधार होने के साथ-साथ शहर के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत भी है। ऐसे में लगातार बढ़ रही सिल्ट की समस्या को समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
यदि मलबे के झील में पहुंचने पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले वर्षों में झील की गहराई, जलधारण क्षमता और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
