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नैनीताल : कृष्ण भक्ति में डूबी सरोवर नगरी, मां नैना देवी मंदिर में गूंजे भजन और पहाड़ी लोकधुनें

दो दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव में सजी भजन संध्या, स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां; बाल नाट्य लीला में नन्हे कलाकार दिखाएंगे कृष्ण की बाल लीलाएं

दो दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव के तहत यो पहाड़ फाउंडेशन और अमर उदय ट्रस्ट ने सजाई भजन संध्या, पहाड़ी लोकधुनों ने बांधा समां

नैनीताल। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मलीला के उल्लास और भक्ति से सरोवर नगरी नैनीताल इन दिनों पूरी तरह कृष्णमय नजर आ रही है। दो दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव के तहत यो पहाड़ फाउंडेशन और अमर उदय ट्रस्ट की ओर से मां नैना देवी मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। मां नैना देवी की स्तुति के साथ कृष्ण भजनों, पहाड़ी लोकधुनों और भक्तिमय प्रस्तुतियों ने मंदिर परिसर में ऐसा माहौल बनाया कि देर शाम तक श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे।

भजन संध्या का शुभारंभ मां नैना देवी की स्तुति एवं वंदना के साथ हुआ। इसके बाद स्थानीय कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालु भी भाव-विभोर नजर आए और कई श्रद्धालु भक्ति में झूमते दिखाई दिए। मंदिर परिसर में गूंजते जयकारों और भजनों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

कार्यक्रम में विरुपाक्ष बैंड ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। वहीं सांवरिया म्यूजिकल ग्रुप नैनीताल ने पहाड़ी भजनों और लोकधुनों की मनमोहक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। पहाड़ की पारंपरिक धुनों और कृष्ण भक्ति का अनूठा संगम श्रद्धालुओं को खूब पसंद आया।

आयोजकों ने बताया कि दो दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव का उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, उनके जीवन एवं दर्शन के साथ-साथ उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति को एक मंच प्रदान करना है। महोत्सव में स्थानीय कलाकारों के साथ बच्चों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया जा रहा है। इससे धार्मिक आयोजन के साथ स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

महोत्सव की अगली कड़ी में ‘श्री कृष्ण : जीवन और दर्शन’ बाल नाट्य लीला का मंचन किया जाएगा। इसमें नन्हे कलाकार भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को अपने अभिनय के माध्यम से मंच पर जीवंत करेंगे। बाल कलाकारों की प्रस्तुतियों को लेकर आयोजकों और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह बना हुआ है।

आयोजकों का कहना है कि धार्मिक आयोजनों को केवल पूजा-पाठ तक सीमित रखने के बजाय इनके माध्यम से स्थानीय कला, संगीत, संस्कृति और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में भी कार्य किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ जन्माष्टमी महोत्सव में भक्ति के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों को विशेष स्थान दिया गया है। आयोजन के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों और पहाड़ की लोक संस्कृति से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है।

भजन संध्या में अमर उदय ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीव लोचन साह, सचिव हेमंत शाह, उपाध्यक्ष घनश्याम लाल साह, उपसचिव प्रदीप शाह, कोषाध्यक्ष किशन सिंह नेगी, सुरेश मलकानी, यो पहाड़ फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. संतोख सिंह बिष्ट, सचिव सागर सोनकर, चंद्रकांत जोशी, दीपक पूलस, जितेंद्र मर्तोलिया, नीरज बिष्ट, शिवा सिंह बिष्ट, चेतन मेहरा, अमित, अभिषेक तिवारी, दीपक जोशी, हिमांशु बिष्ट, दीपा बिष्ट, खुशी, दीप्ति बोरा, अर्जुन बोहरा, लोकेश बिष्ट सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

जन्माष्टमी महोत्सव के दौरान मंदिर परिसर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और भजनों पर झूमते लोगों ने सरोवर नगरी में कृष्ण भक्ति के रंग को और गहरा कर दिया। धार्मिक आस्था, पहाड़ी लोक संस्कृति और स्थानीय प्रतिभाओं के इस संगम ने आयोजन को यादगार बना दिया।