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बारिश से पिथौरागढ़ बेहाल: तवाघाट में पहाड़ दरकने से हाईवे बंद, दारमा घाटी का संपर्क टूटा, 17 सड़कें अब भी बंद

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पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

जगह-जगह भूस्खलन और पहाड़ दरकने की घटनाओं के चलते चीन सीमा को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग घंटों बाधित रहे। सबसे अधिक प्रभावित टनकपुर–तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग रहा, जहां मंगलवार दोपहर करीब दो बजे तवाघाट के समीप पहाड़ से विशाल चट्टान टूटकर सड़क पर गिर गई।

भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर आने से राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद हो गया और चीन सीमा का संपर्क कई घंटों तक बाधित रहा।

प्रशासन और सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का अभियान चलाया।

देर शाम तक व्यास घाटी की ओर जाने वाला मार्ग खोल दिया गया, जिससे चीन सीमा का संपर्क बहाल हो सका।

हालांकि सोबला–तिदांग सीमा मार्ग लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। वहीं दारमा घाटी को जोड़ने वाले मार्ग पर पंपाबे मंदिर के पास एक बार फिर भारी मलबा आने से आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई।

इसके अलावा यहां से करीब एक किलोमीटर दूर भी पहाड़ दरकने की घटना सामने आई है, जिससे मार्ग पर खतरा बना हुआ है।

तवाघाट–लिपुलेख मार्ग पर भी तवाघाट से पांगला के बीच कई स्थानों पर बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा सड़क पर आ गया, जिससे यातायात प्रभावित रहा।

दारमा घाटी का संपर्क अब भी पूरी तरह कटा हुआ है और उच्च हिमालयी क्षेत्र के 13 गांव दूसरे दिन भी देश के बाकी हिस्सों से अलग-थलग पड़े हुए हैं।

जिले में सुबह तक बंद 22 मोटर मार्गों में से पांच मार्गों को खोल दिया गया, लेकिन 17 सड़कें अभी भी बंद हैं।

इन मार्गों के बंद रहने से एक लाख से अधिक ग्रामीण आबादी प्रभावित हो रही है और लोगों को आवश्यक वस्तुओं तथा आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इस बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा भी कुछ समय के लिए प्रभावित रही। बीआरओ ने शाम करीब 4:30 बजे यात्रा मार्ग को यातायात के लिए खोल दिया।

इसके बाद पांचवां कैलाश मानसरोवर यात्रा दल गुंजी के लिए रवाना हुआ, जबकि यात्रा पूरी कर लौट रहा दूसरा दल सुरक्षित धारचूला पहुंच गया।

प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है, जिससे भूस्खलन का खतरा बना हुआ है।