यूजीसी कानून के विरोध में स्वर्ण समाज मुखर, बिल वापस लेने की मांग
सरकार के खिलाफ धरना, समान शिक्षा और समान अधिकार की मांग उठाई
हल्द्वानी। यूजीसी कानून के विरोध में स्वर्ण समाज के लोगों ने बुधवार को हल्द्वानी में धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने प्रस्तावित कानून को लेकर अपनी आपत्ति जताते हुए सरकार से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। धरने के दौरान स्वर्ण समाज से जुड़े लोगों ने कहा कि किसी भी नए कानून को लागू करने से पहले उसके सामाजिक प्रभावों और सभी वर्गों की चिंताओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रस्तावित यूजीसी कानून समाज में समानता और समान अधिकारों की भावना को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और अधिकारों से जुड़े किसी भी कानून का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना होना चाहिए। उनका आरोप है कि प्रस्तावित कानून को लेकर समाज के एक वर्ग में असंतोष और आशंकाएं बनी हुई हैं, जिन्हें सरकार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
धरने पर बैठे लोगों ने सरकार से मांग की कि यूजीसी कानून को लेकर व्यापक स्तर पर चर्चा की जाए और सभी संबंधित वर्गों की राय ली जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए जिससे समाज के किसी वर्ग को अपने अधिकारों या भविष्य को लेकर असुरक्षा महसूस हो।
स्वर्ण समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी वर्ग के अधिकारों का विरोध करना नहीं, बल्कि समानता, समान अधिकार और न्यायपूर्ण व्यवस्था की मांग करना है। उन्होंने सरकार से अपील की कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनों में पारदर्शिता बरती जाए और सभी वर्गों को साथ लेकर निर्णय लिया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया और प्रस्तावित यूजीसी कानून को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में प्रदेश स्तर पर भी विरोध-प्रदर्शन किए जा सकते हैं।
धरने के माध्यम से स्वर्ण समाज ने सरकार से यूजीसी कानून को लेकर शीघ्र स्पष्ट और सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे समान शिक्षा, समान अधिकार और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली व्यवस्था के पक्षधर हैं और अपनी मांग को लेकर आगे भी आवाज उठाते रहेंगे।
