हल्द्वानी। तिकोनिया स्थित बुद्ध पार्क में शुक्रवार को सवर्ण शक्ति संगठन की ओर से एक दिवसीय सत्याग्रह आंदोलन आयोजित किया गया। सत्याग्रह के दौरान उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान रामपुर तिराहा कांड में शहीद हुए आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर उनके चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया।
सत्याग्रह में संगठन से जुड़े लोगों और समर्थकों ने यूजीसी के नए नियमों के विरोध में आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के नियमों को वापस लेने की मांग करते हुए “UGC Roll Back” के नारे लगाए। संगठन के पदाधिकारियों का कहना था कि नए प्रावधानों को लेकर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों में असंतोष है और सरकार तथा संबंधित संस्थाओं को इस विषय पर उनकी आपत्तियों पर विचार करना चाहिए।
संगठन के अध्यक्ष भुवन भट्ट ने कहा कि 2 अक्टूबर उत्तराखंड के लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक महत्व का दिन है। उन्होंने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे लोगों ने अपना बलिदान दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बड़ी संख्या में सवर्ण समाज के लोग होने के बावजूद उनके हितों की अनदेखी की जा रही है। भट्ट ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर विरोध जताते हुए सरकार से इस पर पुनर्विचार करने की मांग की।
विशाल शर्मा ने कहा कि संगठन की लड़ाई किसी जाति या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यूजीसी के नए नियमों को लेकर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच चिंता है। उनका कहना था कि कॉलेजों में होने वाली बहस या असहमति को जातीय भेदभाव के रूप में देखे जाने की स्थिति में विद्यार्थियों के लिए अपनी बात रखना कठिन हो सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक यूजीसी के नियमों को वापस नहीं लिया जाता, तब तक संगठन आंदोलन जारी रखेगा।
तेज सिंह कार्की ने कहा कि उत्तराखंड में युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार असंतोष सामने आ रहा है। उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं और यूजीसी के नियमों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग सरकार तक पहुंचा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो सत्याग्रह को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक विस्तार दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि राज्य निर्माण के पीछे आंदोलनकारियों ने लोकतांत्रिक अधिकारों और बेहतर भविष्य की उम्मीद रखी थी। वक्ताओं ने सरकार से युवाओं और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों पर संवाद स्थापित करने की मांग की।
सत्याग्रह में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। इस दौरान यूजीसी के नियमों को वापस लेने की मांग को लेकर नारेबाजी की गई। कई वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे और व्यापक रूप देने का निर्णय लिया जा सकता है।
कार्यक्रम में अमित चौहान, मुकेश रघुवंशी, प्रकाश शर्मा, हयात सिंह रावत, हरीश कांडपाल, अमर सिंह, पूरन भट्ट, दीवान सिंह, अमित पंत, राकेश नयाल, मदन मोहन जोशी, हरीश रावत, सीमा बत्रा, दीप्ति गुरुरानी, प्रभा खनका, अल्का वार्ष्णेय, प्रियंका वार्ष्णेय, तरनजीत कौर, नेहा शर्मा, प्रियंका सक्सेना, वैशाली लोबियाल, दीपक जोशी, गिरीश पाठक, देव बिष्ट, पीसी शर्मा, देवेंद्र सालकोटी, कौशिक धौनी, प्रीति वर्धन उप्रेती, अंबादत्त, हरि सिंह वाणी, खड़क सिंह, सीसी पंतोला, नारायण दत्त बडोला, तरुण वानखेड़े, पीसी भट्ट, अशोक कुमार मंडल, देवेंद्र सिंह बिष्ट, डॉ. आशुतोष पंत, मनमोहन चौधरी, मुकेश चंद्र शर्मा, दिनेश कुमार तिवारी, राजेश कांडपाल, पूरन चंद्र जोशी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

