नैनीताल गर्मा गर्मी के बीच छात्र महासंघ चुनाव में यतिन पांडे ने निर्विरोध अध्यक्ष पद पर विजय हासिल की
निर्दलीय यतिन की निर्विरोध जीत के बाद गरमाया माहौल, ABVP पर जबरन शामिल कराने के प्रयास का आरोप
सात साल की छात्र सेवा का मिला फल, यतिन पांडे निर्विरोध बने कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्र महासंघ अध्यक्ष
रिपोर्टर गुडडू सिंह ठठोला
हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्र महासंघ का चुनाव इस बार खासा गहमागहमी और विवाद के बीच संपन्न हुआ। अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी यतिन पांडे ने निर्विरोध जीत दर्ज की। खास बात यह रही कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और NSUI दोनों ही अध्यक्ष पद पर अपना प्रत्याशी नहीं उतार सके। वहीं अन्य पदों पर भी प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन हुआ।
छात्र महासंघ के चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर जितेंद्र धामी, सचिव पद पर संचित सिंह, संयुक्त सचिव पद पर अदिति पांडे और कोषाध्यक्ष पद पर भुवन जोशी ने निर्विरोध जीत दर्ज की। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी निर्वाचित पदाधिकारियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई।
यतिन को ABVP में शामिल कराने को लेकर हुआ विवाद
चुनाव परिणाम के बाद छात्र महासंघ अध्यक्ष यतिन पांडे को लेकर परिसर में उस समय स्थिति गर्म हो गई, जब ABVP से जुड़े कार्यकर्ताओं की ओर से उन्हें संगठन में शामिल करने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई। इस दौरान काफी देर तक खींचतान और नोकझोंक का माहौल बना रहा।
निर्दलीय समर्थकों ने इसको लेकर ABVP के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि चुनाव में संगठन अपना प्रत्याशी नहीं उतार सका और अब निर्विरोध निर्वाचित निर्दलीय अध्यक्ष को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान छात्र नेताओं और समर्थकों के बीच काफी देर तक माहौल गरमाया रहा।
हालांकि, अध्यक्ष पद पर निर्विरोध निर्वाचित यतिन पांडे ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी जीत निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर हुई है और वह आगे भी निर्दलीय रहकर ही छात्र-छात्राओं के हित में कार्य करेंगे। उन्होंने किसी संगठन में शामिल होने की बात से इनकार करते हुए अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने की बात कही।
सात साल की छात्र सेवा को बताया जीत का आधार
निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद यतिन पांडे ने छात्र-छात्राओं का आभार जताते हुए कहा कि वह पिछले सात वर्षों से लगातार महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं की सेवा और उनके हितों के लिए काम करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन सात वर्षों की मेहनत का परिणाम उन्हें 29 सितंबर को एमबीपीजी कॉलेज के छात्र-छात्राओं के समर्थन के रूप में मिला।
यतिन पांडे ने अपनी जीत का श्रेय अपने चाचा विपिन पांडे, हिमांशु कबड़वाल, आशीष कबड़वाल और एडवोकेट प्रभाकर कांडपाल को दिया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने लगातार उनका साथ दिया और उनके संघर्ष में सहयोग किया।
उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसे वह पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास करेंगे। उनका कहना था कि महासंघ अध्यक्ष के रूप में उनका उद्देश्य छात्र-छात्राओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाना और उनके हितों के लिए लगातार संघर्ष करना रहेगा।
छात्र-छात्राओं और मातृशक्ति का जताया आभार
यतिन पांडे ने अपनी जीत के लिए एमबीपीजी कॉलेज समेत कुमाऊं विश्वविद्यालय से जुड़े छात्र-छात्राओं का आभार जताया। उन्होंने विशेष रूप से उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने उनके संघर्ष के दौरान उनका समर्थन किया।
उन्होंने कहा कि इस जीत में मातृशक्ति का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है और वह सभी का दिल की गहराइयों से आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं ने जिस विश्वास के साथ उन्हें महासंघ अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है, वह उस विश्वास पर खरा उतरने का पूरा प्रयास करेंगे।
कुमाऊं विश्वविद्यालय छात्र महासंघ के चुनाव में इस बार अध्यक्ष समेत कई पदों पर निर्विरोध निर्वाचन और अध्यक्ष पद के निर्वाचित प्रत्याशी को लेकर संगठनात्मक खींचतान ने चुनाव को चर्चा में ला दिया है। अब निर्वाचित पदाधिकारियों के सामने छात्र हितों से जुड़े मुद्दों को विश्वविद्यालय और महाविद्यालय प्रशासन के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाने की जिम्मेदारी होगी।

