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डीएसबी परिसर की शोध छात्रा नेहा पाल ने पूरी की पीएचडी की अंतिम मौखिक परीक्षा, लाइकेन पर शोध में उत्तराखंड की 47 नई प्रजातियों की पहचान

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर के वनस्पति विज्ञान विभाग की शोध छात्रा नेहा पाल ने अपनी पीएचडी की अंतिम मौखिक परीक्षा सफलतापूर्वक पूर्ण की। नेहा पाल ने लाइकेन (Lichen) विषय पर अपना शोध कार्य किया, जिसमें उन्होंने उत्तराखंड की जैव-विविधता और लाइकेन की प्रजातियों से संबंधित महत्वपूर्ण अध्ययन किया है।

शोध के दौरान उत्तराखंड से 47 लाइकेन प्रजातियां नई दर्ज की गईं, जबकि भारत से चार प्रजातियों का नया रिकॉर्ड सामने आया। इनमें एक प्रजाति ऐसी भी शामिल है, जिसे विज्ञान के लिए नई प्रजाति के रूप में दर्ज किया गया है। शोध कार्य को उत्तराखंड सहित देश में लाइकेन जैव-विविधता के अध्ययन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

नेहा पाल ने अपना शोध कार्य डॉ. संजीव नायका, एनबीआरआई (लखनऊ) तथा डॉ. प्रेम प्रकाश, वनस्पति विज्ञान विभाग, एमबीपीजी कॉलेज के निर्देशन में पूर्ण किया। उनकी अंतिम मौखिक परीक्षा में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. इंद्रजीत सिंह विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। वहीं प्रो. ललित तिवारी, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, डीएसबी परिसर ने परीक्षा की प्रक्रिया संपन्न कराई।

परीक्षा के दौरान शोध छात्रा ने अपने शोध कार्य, शोध निष्कर्षों तथा लाइकेन की जैव-विविधता से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया। शोध के निष्कर्षों से उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले लाइकेन की विविधता और उनके वैज्ञानिक महत्व को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है।

इस अवसर पर वनस्पति विज्ञान विभाग एवं परिसर के अनेक शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। इनमें डॉ. एसएस बरगली, डॉ. किरण बरगली, डॉ. सुषमा टम्टा, डॉ. नीलू लोधियाल, डॉ. अनिल बिष्ट, डॉ. कपिल खुल्बे, डॉ. प्रभा पंत, डॉ. नवीन पांडे, डॉ. हिमानी कार्की, डॉ. हेम जोशी सहित लता, विशाल, शीतल, भावना, पूजा आदि मौजूद रहे।

शोध छात्रा नेहा पाल की इस उपलब्धि पर विभागीय शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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