संगम मैरिज पैलेस में गरजा सवर्ण समाज, UGC के खिलाफ फूटा आक्रोश – आनंद स्वरूप जी बोले, ये कानून नहीं जातीय प्रताड़ना है
संगम मैरिज पैलेस में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में सैकड़ों लोग जुटे, नियम वापस नहीं लेने पर पूरे उत्तराखंड में उग्र आंदोलन की चेतावनी
“अब मौन नहीं रहेगा सवर्ण समाज” : हल्द्वानी जनसंवाद में UGC नियमों के खिलाफ जोरदार हुंकार
हल्द्वानी। सवर्ण शक्ति संगठन उत्तराखंड की ओर से UGC के नए नियमों के विरोध में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम रविवार को हल्द्वानी के संगम मैरिज पैलेस में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों की भागीदारी और UGC के नए नियमों को लेकर व्यापक आक्रोश देखने को मिला। कार्यक्रम स्थल का हॉल खचाखच भरा रहा और उपस्थित लोगों ने एक स्वर में नियम को तत्काल वापस लेने की मांग की।
जनसंवाद कार्यक्रम में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि UGC का नया नियम शिक्षा संस्थानों में समानता और सौहार्द की भावना को मजबूत करने के बजाय समाज के एक वर्ग के साथ भेदभाव की स्थिति पैदा कर सकता है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से इस नियम पर पुनर्विचार करने की मांग की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शांभवी पीठ के पीठाधीश्वर पूज्य आनंद स्वरूप जी महाराज ने कहा कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य ज्ञान, शोध और समान अवसरों का वातावरण तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने UGC के नए नियम का विरोध करते हुए कहा कि इसे लेकर सवर्ण समाज में गंभीर असंतोष है।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम को प्रभावित करने के प्रयास किए गए। महाराज ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम स्थल से जुड़े लोगों पर दबाव बनाने और सवर्ण शक्ति संगठन के प्रदेश अध्यक्ष भुवन भट्ट को भी दबाव में लेने का प्रयास किया गया, जिसे उन्होंने निंदनीय बताया।
“बहुत हो गया मौन, अब सवर्ण समाज जाग गया है” — भुवन भट्ट
सवर्ण शक्ति संगठन उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष भुवन भट्ट ने अपने संबोधन में कहा कि अब सवर्ण समाज अपने अधिकारों और भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चुप नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि संगठन UGC के नए नियम को एकतरफा मानता है और इसके विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखा जाएगा।
भुवन भट्ट ने कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सवर्ण समाज उन राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगेगा जो इस मुद्दे पर मौन हैं। उन्होंने कहा कि समाज की आवाज को दबाने का प्रयास किया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
उन्होंने कहा, “सवर्णों ने न दबना सीखा है और न झुकना। यदि एक आवाज को दबाने का प्रयास होगा तो हजारों-लाखों आवाजें उठेंगी।”
कॉलेजों में नफरत की दीवार खड़ी होने की आशंका
कार्यक्रम में विशाल शर्मा ने कहा कि संगठन को आशंका है कि यह नियम कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्रों के बीच सामाजिक विभाजन को बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि आज की लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी और बच्चों के भविष्य से जुड़े समान अधिकारों के लिए है।
उन्होंने कहा कि समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं को जानता है और अपने संवैधानिक व सामाजिक अधिकारों के लिए संघर्ष करना भी जानता है।
पूर्व मंत्री प्रकाश हरबोला ने समान शिक्षा अधिकारों पर दिया जोर
पूर्व मंत्री प्रकाश हरबोला ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सभी वर्गों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी नियम या व्यवस्था के कारण यदि समाज के किसी वर्ग को यह महसूस होता है कि उसके साथ भेदभाव हो रहा है, तो उस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
“सनातन संस्कृति जोड़ने की बात करती है”
योग गुरु मुकेश रघुवंशी ने कहा कि सनातन संस्कृति समाज को एकजुट करने और सभी को साथ लेकर चलने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि ऐसी किसी भी व्यवस्था का समर्थन नहीं किया जा सकता, जिससे समाज में विभाजन या तनाव की स्थिति उत्पन्न हो।
वहीं तेज सिंह कार्की ने कहा कि सवर्ण समाज की लंबे समय से उपेक्षा की जा रही है और अब समाज को संगठित होकर अपनी बात मजबूती से रखनी होगी। उन्होंने राजनीतिक दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखने की प्रवृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारें और राजनीतिक दल समाज की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लेते हैं तो इसका असर वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है।
पूरे उत्तराखंड में आंदोलन की चेतावनी
जनसंवाद कार्यक्रम के अंत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि UGC के नए नियम को तत्काल वापस लिया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो सवर्ण शक्ति संगठन पूरे उत्तराखंड में व्यापक और उग्र आंदोलन शुरू करेगा।
कार्यक्रम में तरुण वानखेड़े, अमित चौहान, संजय बिष्ट, भुवन पांडे, हरीश रावत, सीमा बत्रा, दीप्ति गुररानी, प्रभा खनका, किरण बोरा, अलका वार्ष्णेय, लीला भंडारी, प्रियंका वार्ष्णेय, तृप्ति वार्ष्णेय, रश्मि शर्मा, आंसू राठौर, ममता आहूजा, दीपक जोशी, गिरीश पाठक, काजल खत्री, अम्बा दत्त भट्ट, बालम जोशी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने एकजुट होकर UGC के नए नियमों पर पुनर्विचार करने और विवादित प्रावधानों को वापस लेने की मांग उठाई। संगठन ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में जनजागरण और आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।

